हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला, CBSE स्कूलों के नए शिक्षक 10 साल तक रहेंगे एक ही स्थान पर

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हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में तैनात होने वाले नए शिक्षक कैडर की पहले चरण में 10 वर्ष तक ट्रांसफर नहीं की जाएगी। इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति विशेष चयन परीक्षा से होगी। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा शर्तें, स्थानांतरण नीति और विशेष भत्ते को लेकर विस्तृत प्रावधान किए हैं। इस संबंध में मंगलवार को शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष शेष हैं, वे भी इस चयन परीक्षा में भाग ले सकेंगे। हालांकि आउटसोर्स, मानदेय आधार या ग्रांट इन एड के तहत नियुक्त शिक्षक इस परीक्षा के लिए पात्र नहीं होंगे। चयनित शिक्षकों को मेरिट आधार पर स्कूलों का आवंटन किया जाएगा।

सीबीएसई स्कूलों के लिए प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, पीजीटी, डीपीई, टीजीटी, सीएंडवी, पीईटी और जेबीटी का अलग उप कैडर बनाया जाएगा। चयनित शिक्षकों का मूल कैडर से कोई संबंध नहीं रहेगा। यदि चयन प्रक्रिया के बाद भी पद रिक्त रहते हैं तो उन्हें अस्थायी स्टॉप-गैप व्यवस्था से भरा जाएगा, लेकिन ऐसे शिक्षकों को विशेष भत्ता नहीं मिलेगा। शिक्षकों का चयन छात्र-शिक्षक अनुपात और शिक्षक-सेक्शन अनुपात को ध्यान में रखकर किया जाएगा। 1200 विद्यार्थियों वाले स्कूल के लिए मानक स्टाफिंग पैटर्न तय किया गया है, जबकि वास्तविक नामांकन के आधार पर शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की संख्या घटाई या बढ़ाई जा सकेगी। चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और काउंसलिंग आधार पर होगी।

सीबीएसई स्कूलों में चयनित शिक्षकों को पहले चरण में 10 वर्ष तक उसी स्कूल में तैनात रखा जाएगा। 10 वर्ष के बाद ही स्थानांतरण संभव होगा। विशेष परिस्थितियों में पांच प्रतिशत कोटे के तहत पहले ट्रांसफर की गुंजाइश रखी गई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 130 स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। वहीं जमा एक और जमा दो कक्षा में विद्यार्थियों का प्रवेश भी परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। नई नीति के तहत एनटीटी, विशेष शिक्षक, वेलनेस शिक्षक, वोकेशनल या स्किल टीचर और को-करिकुलर विशेषज्ञों की नियुक्ति सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में चयनित शिक्षकों को विशेष मासिक भत्ता दिया जाएगा। प्रिंसिपल को 4500 रुपये, वाइस प्रिंसिपल को 4000 रुपये और अन्य शिक्षकों (पीजीटी, टीजीटी, डीपीई, सीएंडवी, जेबीटी, पीईटी) को 3500 रुपये प्रति माह विशेष भत्ता मिलेगा। यह भत्ता प्रदर्शन आधारित होगा। कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में इसे घटाया या वापस लिया जा सकेगा।

हर शिक्षक के लिए वार्षिक अनिवार्य प्रशिक्षण तय किया गया है। इसमें आईसीटी, समावेशी शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर विशेष फोकस रहेगा। इसके लिए एनसीईआरटी, सीबीएसई, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से साझेदारी की जाएगी। शिक्षकों का मूल्यांकन छात्र परिणाम, बोर्ड परीक्षा प्रदर्शन, नवाचार और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। सीबीएसई स्कूलों की स्टाफिंग संरचना की हर साल शैक्षणिक सत्र से पहले समीक्षा की जाएगी।

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