
सिरमौर जिले के संगड़ाह इलाके में एक साधु के अपमान और मारपीट से जुड़ी जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर आक्रोश का कारण बनी थीं, उन पर अब सुलह की मुहर लग गई है। जिस स्थान पर तनाव चरम पर था, वहां अब समाज और सनातन परंपरा के प्रति सम्मान की एक नई मिसाल पेश की गई है।
अपमान से आत्मग्लानि तक का सफर
कुछ दिन पूर्व वायरल हुए एक विचलित करने वाले वीडियो ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे साधु समाज को झकझोर कर रख दिया था। वीडियो में साधु की जटाओं और दाढ़ी के साथ की गई अभद्रता ने क्षेत्र में भारी रोष पैदा कर दिया था। लेकिन अब इस कहानी में एक बड़ा मोड़ आया है। पंचायत के उपप्रधान, जो इस घटना के केंद्र में थे, उन्होंने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक मंच पर पश्चाताप किया।
समझौते की मुख्य बातें:
सार्वजनिक क्षमा याचना: पंचायत प्रतिनिधि ने पूरे गांव और स्थानीय लोगों की उपस्थिति में साधु के चरण स्पर्श कर अपनी भूल स्वीकार की।
नशे के आरोपों का खंडन: सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पंचायत प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से माना कि साधु महात्मा पर लगे नशे के तमाम आरोप निराधार थे; वे पूरी तरह निर्दोष थे।
साधु समाज से माफी: केवल व्यक्ति विशेष से ही नहीं, बल्कि प्रतिनिधि ने समस्त अखाड़ा परिषद और संत समाज से इस अनजाने में हुई चूक के लिए लिखित और मौखिक माफी मांगी है।
प्रशासन और शांति
इस समझौते के बाद संगड़ाह में फैला तनाव अब शांत हो गया है। स्थानीय लोगों और पंचायत के अन्य सदस्यों की मध्यस्थता ने मामले को कानूनी पेचीदगियों और सांप्रदायिक रंग लेने से पहले ही सुलझा लिया। हालांकि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय प्रशासन अभी भी सतर्कता बरत रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
