
हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास एवं पर्यटन व्यापार पंजीकरण नियम, 2012 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर मसौदा नियम आपत्तियों और सुझावों के लिए राजपत्र में प्रकाशित कर दिए गए हैं। 30 दिन के भीतर निदेशक पर्यटन को मेल के माध्यम से आपत्तियां और सुझाव भेजे जा सकते हैं। प्रदेश में होटल और होम स्टे सहित अन्य पर्यटन इकाइयों को अब हर दो साल में पंजीकरण का नवीनीकरण करवाना होगा। अब तक तीन साल बाद नवीनीकरण होता था। नवीनीकरण शुल्क भी पंजीकरण शुल्क के बराबर होगा। अब तक नवीनीकरण शुल्क पंजीकरण शुल्क के मुकाबले कम होता था। अगर यह प्रावधान लागू होते हैं तो पर्यटन कारोबारियों की संचालन लागत बढ़ेगी। नवीनीकरण शुल्क को पंजीकरण शुल्क का सौ फीसदी करने से भी संचालकों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसके अलावा पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण शुल्क अब 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी के आधार पर तय होगा। अब तक पंजीकरण शुल्क श्रेणी आधारित था।
अगर यह बदलाव लागू होता है तो महंगे होटलों और होम स्टे का पंजीकरण शुल्क बढ़ सकता है। बजट होटल और कम किराये वाली इकाइयों पर इसका कम असर पड़ेगा। ऑफ-सीजन और ऑन-सीजन के अंतर को नजरअंदाज कर 100 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी मानने से पर्यटन इकाइयों के संचालकों को नुकसान हो सकता है। इसके अतिरिक्त पहली बार शुल्क निर्धारण में हॉल और कॉन्फ्रेंस एरिया को भी शामिल किया गया है। जिससे शादी, सम्मेलन और इवेंट आधारित पर्यटन इकाइयों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा। बड़े होटल और रिसॉर्ट्स को छोटे संचालकों की तुलना में ज्यादा शुल्क चुकाना होगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत पर्यटन इकाइयों के पंजीकरण और संबंधित शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने की तैयारी है। अब कार्यालय में जाकर नकद या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान के स्थान पर ई-सेवा पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भुगतान होगा।
