अचानक क्यों बदला नियम? शिमला के ढाबों और होटलों को सिलिंडर की जगह मिट्टी का तेल

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जिला शिमला में होटलों, ढाबों और रेस्तरां समेत हजारों व्यावसायिक उपभोक्ताओं को फिलहाल गैस सिलिंडर नहीं मिलेंगे। गैस की किल्लत के बीच जिला प्रशासन ने फिलहाल इन्हें दी जाने वाली गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पर ब्रेक लगा दी है। इन्हें अब केरोसिन यानि मिट्टी तेल देने की तैयारी है।

जिला प्रशासन के अनुसार कारोबारियों से इसकी डिमांड आने के बाद इन्हें मिट्टी तेल मुहैया करवाया जाएगा। इसके लिए तैयारी की जा रही है। जल्द ही जरूरत पड़ने पर इसकी बिक्री शुरू कर दी जाएगी। जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार जिला शिमला में 9741 व्यावसायिक उपभोक्ता हैं। इनमें पांच हजार से ज्यादा उपभोक्ता होटल, ढाबे और रेस्तरां आदि से जुड़े हैं। इन्हें अभी बुकिंग के बावजूद सिलिंडर नहीं मिलेगा। बाकी कनेक्शन स्कूलों और अस्पतालों को दिए गए हैं। इन्हें पहले की तरह बुधवार को भी आपूर्ति दी गई है। जिला शिमला में 3.14 लाख घरेलू गैस उपभोक्ता हैं। इनके लिए फिलहाल गैस की कोई किल्लत नहीं है।

विभाग के अनुसार देश में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस का उत्पादन हो रहा है और शहर को भी अभी पर्याप्त आपूर्ति मिल रही है। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति आयात से की जाती है जो फिलहाल ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण बंद है। यही कारण है कि व्यावसायिक उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर नहीं दिए जा रहे हैं। घरेलू सिलिंडरों का व्यावसायिक कार्याें में दुरुपयोग न हो, इसके लिए 25 दिन में एक बार ही इसकी आपूर्ति देने का फैसला लिया है। जिला विभाग के पास अभी स्कूलों और अस्पतालों के लिए स्टॉक सुरक्षित कर दिया है। इनमें गैस की कमी नहीं आएगी। जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक नरेंद्र धीमान ने कहा कि जिला में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। होटलों और ढाबों को फिलहाल व्यावसायिक सिलिंडर नहीं दिए जा रहे हैं।

जिला प्रशासन कारोबारियों को मिट्टी तेल की आपूर्ति तो देने जा रहा है लेकिन इसका ज्यादा फायदा नहीं होगा। कारोबारियों का कहना है कि अब मिट्टी तेल के इस्तेमाल के लिए ज्यादातर दुकानों ढाबों में स्टोव या दूसरे उपकरण नहीं हैं। ऐसे में इसकी आपूर्ति से फायदा नहीं होगा। इसकी जगह कारोबारी इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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