
हिमाचल प्रदेश में जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। राज्य में वनों में आग की घटनाएं पिछले साल के 111 से दोगुना से ज्यादा 258 पहुंची हैं। इस वर्ष आग से वीरवार तक लगभग 81 लाख रुपये के नुकसान का आकलन है। कोटखाई में जंगल की आग से काली माता मंदिर जलकर राख हो गया। सोलन के जंगलों में लग रही आग का असर कालका-शिमला रेललाइन पर भी देखने को मिला। बुधवार को आग के चलते सनवारा के समीप दो रेलगाड़ियां करीब ढाई घंटा एक जगह खड़ी रहीं। रेलवे ट्रेक के आसपास आग लगने के कारण दोनों ट्रेनों को रोक दिया गया। इस दौरान रेलवे बोर्ड की टीमों के अलावा वन विभाग, अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और उन्होंने आग पर काबू पाया।
जुखाला के मंगरोट जंगल में भी आग भड़क उठी। सोलन के डगशाई, देवठी और शमलेच के जंगल में भी आग की तेज लपटें उठीं। ऊना के बंगाणा उपमंडल की रागगढ़ धार रेंज में भी आग से नुकसान हुआ।कोटखाई के शिलड़ू गांव के पास जंगल में भीषण आग लग गई। आग रिहायशी इलाके तक पहुंच गई थी। शिलड़ू गांव के पास जंगल के साथ स्थित काली माता मंदिर भी पूरी तरह जलकर राख हो गया। बिलासपुर के कई वन क्षेत्रों में बुधवार रात से लेकर भड़की आग ने भारी तबाही मचाई। आग की चपेट में आने से बहुमूल्य वन संपदा राख हो गई।
जुखाला क्षेत्र के मंगरोट जंगल में बुधवार देर रात को अचानक आग भड़क उठी। वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पा लिया।जिला मुख्यालय सोलन और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में भड़की जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही। बीते एक सप्ताह से जारी इस भीषण आग की चपेट में आने से कई जंगल धधके हैं। डगशाई, देवठी और शमलेच के जंगल में उठती तेज लपटें और धुआं दूर-दूर से देखा जा रहा है। वन विभाग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जिला मुख्यालय के करीब 125 हेक्टेयर वन भूमि पूरी तरह से आग की भेंट चढ़ चुकी है। ऊना जिले में करीब 25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। इससे एक पशुशाला आग की चपेट में आकर जलकर राख हो गई।
हमीरपुर में इस फायर सीजन में जिले में विभिन्न क्षेत्रों की 21 बीटों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सबसे अधिक नुकसान वन बीट कुठेड़ा में हुआ है। यहां पर फायर सीजन से पहले काटे गए 400 पेड़ के स्लीपर जलकर राख हो गए। चंबा में पिछले दिनों बनीखेत के बौंखरी मोड़ गांव में एक पाइप के गोदाम में अचानक भीषण आग लगी। धुएं के गुब्बार उठने लगे और पूरा गोदाम जलकर राख हो गया। कुल्लू की ऊझी घाटी में स्थित नग्गर के जंगल में 26 मई को देर रात आग भड़की थी। इसके कारण देवदार और काईल के छोटे पौधे झुलस गए। दमकल विभाग की टीम नग्गर से दस मिनट पैदल चलकर मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने में सफल रही थी।
258 वन आग की घटनाएं सामने आईं
15 अप्रैल से 28 मई तक हिमाचल प्रदेश में वन आग की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल 258 वन आग की घटनाएं सामने आई हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मंडी, धर्मशाला, नाहन और अन्य वन मंडल हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल लगभग 3310.22 हेक्टेयर क्षेत्र आग से प्रभावित हुआ, जिसमें लगभग 2,830.21 हेक्टेयर प्राकृतिक वन क्षेत्र है। इसके अलावा पौधरोपण क्षेत्र और अन्य भूमि भी प्रभावित हुई है।
किस वन सर्कल में कितनी घटनाएं
| वन सर्कल | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| मंडी | 28 | 83 |
| धर्मशाला | 26 | 59 |
| नाहन | 21 | 52 |
| हमीरपुर | 19 | 17 |
| शिमला | 4 | 13 |
| सोलन | 4 | 10 |
| बिलासपुर | 3 | 9 |
| चंबा | 3 | 8 |
| जीएचएनपी कुल्लू | 0 | 2 |
| रामपुर | 1 | 1 |
| वन्य प्राणी दक्षिण | 2 | 4 |
| कुल | 111 | 258 |
मानसिक रोगी अस्पताल टुटीकंडी के पास दहका जंगल, रात तक उठती रही लपटें
राजधानी के जंगलों में आग लगने का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। टुटीकंडी स्थित मानसिक रोगी अस्पताल के पास भी आग लगने की घटना सामने आई। आग पर एक बार काबू पा लिया था लेकिन रात को फिर भड़क गई। वहीं, शिमला बाग गांव के समीप वीरवार को जंगल में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा।
आग फैलते हुए मानसिक रोगी अस्पताल के आसपास तक पहुंच गई, लेकिन अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके अलावा जुन्गा के जंगलों में भी गुरुवार सुबह आग भड़क उठी, जो काफी क्षेत्र में फैल गई। वहीं रझाना के जंगलों में पिछले दो दिनों से लगी आग पर अब जाकर काबू पाया जा सका है। लगातार प्रयासों के बावजूद बुधवार तक आग बार-बार सुलगती रही और जंगल का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया।
पांजड़ी क्षेत्र में भी आग लगने की घटना सामने आईं
पांजड़ी क्षेत्र में भी आग लगने की घटना सामने आई। टुटीकंडी से सटे पांजड़ी के कब्रिस्तान क्षेत्र में अचानक आग भड़क उठी। वन विभाग को दोपहर 2 बजे सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और दमकल विभाग के साथ मिलकर आग बुझाने का कार्य शुरू किया। इस घटना में कब्रिस्तान की लगभग 0.10 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई। वन विभाग के ब्लॉक अधिकारी योगेश ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत की गई।
वहीं शहरी शिमला के डिप्टी रेंजर मोहन दास ने कहा कि सूचना मिलते ही टीम तुरंत पांजड़ी पहुंच गई थी और शाम तक आग पर नियंत्रण पा लिया गया। बालूगंज अग्निशमन केंद्र के फायर ऑफिसर गोपाल ने बताया कि मानसिक रोगी अस्पताल के आसपास के जंगल में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिस पर काबू पाने के लिए विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है। इन घटनाओं में जंगल की वनस्पति और छोटे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी तक कुल नुकसान का आकलन नहीं हो पाया है।
