
हिमाचल प्रदेश में माचा (मैचा) चाय के उत्पादन और प्रसंस्करण की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रदेश की अनुकूल जलवायु, समृद्ध चाय परंपरा और अनुसंधान संस्थानों का सहयोग इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। यह कहना है जाइका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो का। उन्होंने परियोजना के नवाचारों और किसानों की सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की।
जाइका इंडिया मिशन ने कांगड़ा और पालमपुर क्षेत्र के भ्रमण के बाद धर्मशाला स्थित होटल धौलाधार हाइट्स में आयोजित समापन बैठक में हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना फेज-2 की प्रगति और उपलब्धियों की सराहना की। मिशन ने परियोजना के तहत किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, कृषि उद्यमिता और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को सराहनीय बताया।
बैठक में परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि एचपीसीडीपी (फेज-2) किसानों को परंपरागत खेती से आगे बढ़ाकर बाजारोन्मुख और उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधियों से जोड़ने का कार्य कर रही है। किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने तथा कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए कई अभिनव पहलें सफलतापूर्वक लागू की जा रही हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ताकुरो ने कहा कि वैश्विक बाजार में माचा चाय की बढ़ती मांग किसानों और उद्यमियों के लिए उच्च आय का नया अवसर बन सकती है। यदि चाय उत्पादक, सहकारी संस्थाएं, अनुसंधान संस्थान और निजी उद्यम मिलकर कार्य करें तो कांगड़ा चाय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।
बैठक में जाइका मिशन के सदस्यों, परियोजना अधिकारियों और अन्य हितधारकों ने हिमाचल के चाय क्षेत्र, विशेषकर माचा चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भावी रणनीतियों और कार्ययोजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
क्या है माचा चाय
माचा जापान की विशेष प्रकार की ग्रीन टी है, जिसे पत्तियों को पीसकर तैयार किया जाता है। स्वास्थ्य लाभ और प्रीमियम बाजार में ऊंची कीमत मिलने के कारण वैश्विक मांग बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक कांगड़ा की जलवायु और चाय उत्पादन की परंपरा माचा चाय के लिए उपयुक्त साबित हो सकती है।
