अस्तित्व का संकट: रिकॉर्ड में आबाद, हकीकत में वीरान हिमाचल का वैहम्बा गांव, सभी परिवार कर चुके पलायन

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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गगरेट विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत ज्वाल का वैहम्बा गांव अब केवल सरकारी रिकॉर्ड में ही आबाद है। आज यह दुर्गम गांव पूरी तरह वीरान हो चुका है। मूलभूत सुविधाओं, बेहतर शिक्षा और आजीविका के साधनों के अभाव ने ग्रामीणों को अपना पुश्तैनी आशियाना छोड़ने पर मजबूर कर दिया। हालात ऐसे हैं कि गांव से सभी परिवार पलायन कर चुके हैं और अब वहां केवल उजड़े मकान, बंद पड़ा स्कूल ही दिखाया देता है। विकास के दावों के बीच वैहम्बा गांव कुछ ऐसी ही हकीकत बयां कर रहा है।सभी ग्रामीण वर्षों पहले पलायन कर चुके

इस दुर्गम गांव से सभी ग्रामीण वर्षों पहले पलायन कर चुके हैं। आज गांव का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित है। कई वर्ष पहले सुविधाओं के अभाव के चलते ग्रामीणों ने पंचायत से नाम कटवाकर राशन कार्ड तक बदलवा डाले। वर्तमान में ग्राम पंचायत नकड़ोह और रामनगर के बशिंदे होकर रह गए हैं। मुख्य कस्बे से भले ही 15 किलोमीटर दूरी पर यह दुर्गम क्षेत्र में गांव है। जहां के लिए दौलतपुर चौक से तो कच्चा मार्ग लिंक करता है, लेकिन दूसरी ओर चिंतपूर्णी से मार्ग के बीच में इस गांव के लिए नाले की खाई होने के चलते संपर्क नहीं बन पाया है। इस संदर्भ में मनरेगा लोकपाल ने स्थिति की रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेजी हैचारों ओर उजड़े आशियाने ही दिखे

दूसरी ओर दो साल पहले पलायन कर चुके शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर जब विभाग की ओर से अधिकारी वहां पर पहुंचे, तो गांव में कोई भी ग्रामीण नजर नहीं आया। चारों ओर उजड़े आशियाने ही दिखे। अब भले ही यहां पर सार्वजनिक शौचालय, स्ट्रीट लाइट समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कर दी है, लेकिन उनका लाभ उठाने वाला कोई भी ग्रामीण नजर नहीं आया। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यहां पर कोई भी ग्रामीण जीवन बसर करता नजर नहीं आया है। पंचायत की ओर से भी प्रतिनिधि और अधिकारी जब मतदान के दौरान क्षेत्र में गए, तो भी ग्रामीण नहीं दिखा। मनरेगा लोकपाल ऊना रमेश गौतम का कहना है कि दुर्गम गांव में सार्वजनिक शौचालय, स्ट्रीट लाइट, पक्के रास्ते, तलाब समेत अन्य सुविधाएं तो देखी गईं, लेकिन गांव में कोई ग्रामीण नजर नहीं आया। 

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