
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को मकान जलने के मामले में पीड़ित को बीमा क्लेम देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित को 1.25 करोड़ रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया है। इस क्लेम राशि पर शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही अदालत ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 75,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये जुर्माने के एवज में देने का आदेश दिया है। कंपनी को यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करना होगा।
टिक्कर शिमला निवासी शिकायतकर्ता हर्ष रांटा ने अपने 30 कमरों के मकान का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा करवाया था। 2 सितंबर 2023 की रात को भीषण आग लगने से उनका पूरा मकान और उसमें रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। घटना की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को तुरंत दे दी थी। पीड़ित ने जब अपना क्लेम मांगा तो कंपनी ने विभिन्न तकनीकी आधारों पर इसे लटकाए रखा। कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता ने आवश्यक दस्तावेज नहीं दिए हैं और मकान पैतृक संपत्ति है जिसके अन्य नौ वारिस भी हैं। इसके अलावा कंपनी के सर्वेयर ने नुकसान का आकलन 80 लाख रुपये के करीब किया था। आयोग ने सर्वेयर की उस रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया जिसमें 50 प्रतिशत डेप्रिसिएशन काटा था। आयोग ने टिप्पणी की कि यह रिपोर्ट विरोधाभासी थी।
कोर्ट ने कहा-कंपनी का रुख अनुचित
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी का रुख पूरी तरह से अनुचित था। आयोग ने कहा उपभोक्ता ने आग से हुए नुकसान से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज पहले ही उपलब्ध करवा दिए थे। कंपनी की ओर से दस्तावेजों की मांग करना केवल क्लेम को टालने की एक चाल थी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियों को तकनीकी आधार पर वास्तविक दावों को खारिज नहीं करना चाहिए। परिवार के अन्य सदस्यों ने शपथ पत्र देकर स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें क्लेम मिलने पर कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए कंपनी का यह तर्क भी खारिज कर दिया था कि उपभोक्ता को केवल हिस्सा मिलना चाहिए।
