
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक निजी अस्पताल में कार्यरत पूर्व महिला गाइनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में महिला डॉक्टर ने अस्पताल प्रबंधन पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए 1.60 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे और जांच रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की थी। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) और स्थानीय समिति (एलसी) दोनों की रिपोर्ट आ चुकी है। दोनों ही याचिकाकर्ता के पक्ष में नहीं रही हैं।
अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने इससे पहले भी हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपीलीय अदालत का रुख नहीं किया। यदि किसी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम (पाॅश एक्ट) के तहत आईसीसी या लोकल समिति की जांच रिपोर्ट से कोई पक्ष असंतुष्ट होता है, तो सीधे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने के बजाय कानून के तहत अधिसूचित अपीलीय मंच औद्योगिक न्यायाधिकरण-सह-श्रम न्यायालय में धारा 18 के तहत अपील दायर करनी होती है।
यह है मामला याचिकाकर्ता ने 3 जुलाई 2019 को पालमपुर स्थित वैद्य भूपेंद्र रोटरी महिला एवं बाल देखभाल अस्पताल में अनुबंध पर बतौर कंसल्टेंट गाइनोकोलॉजिस्ट काम शुरू किया था। सेवा शर्तों के अनुसार इस्तीफा देने के लिए 90 दिनों के पूर्व नोटिस या 90 दिनों के वेतन का प्रावधान था। याचिकाकर्ता ने 6 जनवरी 2022 को केवल एक महीने के नोटिस पर इस्तीफा दे दिया। प्रबंधन की ओर से 90 दिन के नियम का हवाला देने के बाद विवाद बढ़ा। प्रबंधन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में महिला डॉक्टर ने अस्पताल के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए।
महिला डॉक्टर के आरोपों के बाद मामले में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पाॅश एक्ट) के तहत दो अलग-अलग जांच की गईं। याचिकाकर्ता के अनुरोध पर आईसीसी समिति के एक सदस्य को बदला भी गया। गहन जांच के बाद समिति ने 5 मई 2022 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जो याचिकाकर्ता के पक्ष में नहीं थी। मामला महिला एवं बाल विकास निदेशालय के जरिये स्थानीय समिति को भी भेजा गया। समिति ने 5 मार्च 2022 को अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट सौंपी, जिसमें भी आरोप साबित नहीं पाए गए।
मेडिकल कॉलेज चंबा का सफाई ठेका रद्द करने से इन्कार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में स्वच्छता (सफाई) सेवाओं का ठेका रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने आरके कंपनी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादी ठेकेदार (सफल बोलीदाता) को काम सौंपे जाने के निर्णय को पूरी तरह वैध ठहराया। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में मेडिकल कॉलेज चंबा के लिए स्वच्छता सेवाओं का ई-टेंडर आमंत्रित किया गया था।
