
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को समय पर करवाने के लिए दायर याचिका पर करीब तीन घंटे तक बहस हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत और जिला परिषदों के पुनर्सीमांकन को लेकर जारी अधिसूचना को एक अन्य खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है और 10 जनवरी तक लोगों को आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया है। ऐसी परिस्थितियों में नियमों के अनुसार चुनाव करवाने के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय लगेगा। ऐसे में हिमाचल प्रदेश में समय पर चुनाव करवाना संभव नहीं है। दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार जानबूझकर चुनाव करवाने में आनाकानी कर रही है। पुनर्सीमांकन वाली जो अधिसूचना रद्द की गई है, वह केवल जिला परिषद शिमला से संबंधित है।
अब मामले की सुनवाई मंगलवार को न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ करेगी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जिला परिषद पुनर्सीमांकन वाली याचिका में चुनाव आयोग को पार्टी न बनाने पर मामले को उसी खंडपीठ को भेजा है, जिसने मामला पहले सुना है। खंडपीठ ने कहा कि यह एक सांविधानिक मुद्दा है। एक तरफ जहां राज्य सरकार पंचायत चुनाव हिमाचल में आई आपदा की वजह से टाल रही है, वहीं दूसरी ओर एक अलग खंडपीठ ने पंचायत, जिला परिषद पुनर्सीमांकन वाले संशोधित रूल को खारिज कर दिया है। ऐसी परिस्थितियों में यह सही रहेगा कि मामले की सुनवाई वही खंडपीठ करे, जिसने देवेंद्र सिंह नेगी मामले में पुनर्सीमांकन वाली अधिसूचना को खारिज किया है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव कराने में अपाहिज महसूस कर रही है। दूसरी खंडपीठ ने 5 दिसंबर 2025 को पंचायती राज एक्ट में जिला परिषद और पंचायत समितियों के परिसीमन यानी पुनर्सीमांकन से जुड़े संशोधित नियम 9(2) के प्रावधान को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जिला परिषद एवं पंचायत समिति के चुनाव क्षेत्रों से छेड़छाड़ से जुड़ा प्रावधान मनमाना, अन्यायपूर्ण, अतार्किक और अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ संविधान के साथ टकराव को दर्शाता है। संशोधित नियम 9(2) यह प्रावधान करता है कि पंचायत समिति क्षेत्र जिला परिषद के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र बनाने के लिए एक इकाई होगा।
नगर निगम बद्दी की अधिसूचना निरस्त, एक हफ्ते में आपत्तियों पर लें फैसला : हाईकोर्ट
प्रदेश हाईकोर्ट ने बद्दी नगर परिषद को नगर निगम बनाने की जारी अधिसूचना रद्द कर दी है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता दीपेंद्र कुमार सिंगला और अन्य (मोतिया प्लाजा कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के निवासी) की ओर से उठाई गईं आपत्तियों पर 10 जनवरी तक निर्णय लें। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुना जाना चाहिए और उसके बाद ही एक तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए। याचिकाकर्ता, जो बद्दी स्थित ”मोतिया प्लाजा” के दुकानदार और निवासी हैं, का कहना है कि उन्हें नगर निगम बद्दी के प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल करने या बाहर रखने के संदर्भ में उनकी आपत्तियों पर सरकार ने अब तक कोई गौर नहीं किया है। उनकी मुख्य मांग यह है कि उनके क्षेत्र को भी नगर परिषद या प्रस्तावित नगर निगम की सीमा में उचित स्थान दिया जाए। अदालत ने संज्ञान लिया कि इससे पहले 18 दिसंबर, 2025 को ग्राम पंचायत हरिपुर संधोली बनाम हिमाचल राज्य मामले में भी खंडपीठ ने नगर निगम बनाने की अधिसूचना को रद्द करते हुए आपत्तियों को दोबारा सुनने के निर्देश दिए थे। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 23 दिसंबर 2024 को नगर परिषद बद्दी को नगर निगम में बदलने की अधिसूचना जारी की थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने तकनीकी आधारों पर रद्द कर दिया था। वर्तमान में बद्दी नगर परिषद ही अस्तित्व में है।
तीसरे बच्चे के जन्म पर भी महिला मातृत्व अवकाश की हकदार : हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर फिर से एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला कर्मचारी के दो बच्चे हैं तो सरकारी सेवा में आने के बाद वह तीसरे बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश की हकदार हैं। कोर्ट ने सरकार और संबंधित विभाग को दो हफ्ते में याचिकाकर्ता के मातृत्व अवकाश के मामले पर विचार कर निर्णय लेने को कहा है। अदालत ने कहा कि इस आदेश के सभी लाभ याचिकाकर्ता को प्रदान किए जाए। अदालत ने यह आदेश रीमा देवी की ओर से दायर याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता नियमित सरकारी कर्मचारी हैं। उनके पहले दो बच्चों का जन्म सरकारी सेवा में आने से पहले हुआ था। 25 जुलाई 2025 को तीसरे बच्चे का जन्म हुआ। जब उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया, तो विभाग ने 6 नवंबर 2025 को उनके अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सीसीएस (लीव) रूल्स, 1972 के नियम 43(1) के तहत दो से अधिक जीवित संतान होने पर मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता है।
