
हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में बड़े स्तर पर अनियमिता सामने आई है। राज्य में वर्षों से पेंशन ले रहे 42,867 लाभार्थी ऐसे पाए गए हैं, जो या तो मृत हैं या फिर योजनाओं के लिए अपात्र थे। इनमें 37,335 मृत और 5,532 अपात्र लाभार्थी हैं। मामला सामने आने पर अब सचिव वित्त, योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी डॉ. अभिषेक जैन ने नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
राज्य सचिवालय में बीते दिनों आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि एप के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों की ई-केवाईसी कराई गई। इस प्रक्रिया के दौरान जब डाटा का मिलान किया गया तो 42,867 लाभार्थी मृत या अपात्र पाए गए। निदेशक (आईटी) ने बताया कि वर्ष 2016 से अब तक सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पोर्टल से कुल 4,52,779 मृत्यु रिकॉर्ड प्राप्त किए गए हैं। इनमें से 1,35,473 रिकॉर्ड आधार संख्या से सीडेड पाए गए हैं।
सचिव वित्त ने निर्देश दिए कि इन सभी आधार-सीडेड रिकॉर्ड्स का ई-केवाईसी आधारित पेंशन डाटाबेस से तत्काल मिलान किया जाए और मृत लाभार्थियों को योजनाओं से हटाने की प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। बैठक में यह भी बताया गया कि सीआरएस डाटा का सत्यापन करने के बाद 2,378 लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से हटा दिया है। ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभागों ने अभी और विवरण मांगे हैं।
बैठक में कहा गया कि यह मामला केवल डाटा सुधार तक सीमित नहीं रहेगा। फील्ड स्तर पर तैनात कर्मचारियों से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक, जिनकी लापरवाही के कारण मृत और अपात्र लोग वर्षों तक पेंशन लेते रहे, उन सभी पर कार्रवाई की जाए। सचिव वित्त ने स्पष्ट कहा कि कल्याणकारी योजनाओं का पैसा केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी और सीआरएस आधारित सत्यापन को और सख्त किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों की कोई गुंजाइश न रहे।
