
रावी नदी राष्ट्रीय जलमार्ग-84 को रणजीत सागर बांध से चमेरा बांध तक रिवर क्रूज पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है, जहां पहली जेटी जल्दी तैयार हो जाएगी। इसके अलावा, सतलुज नदी राष्ट्रीय जलमार्ग-98 को धार्मिक और पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम चल रहा है। यह मार्ग हिमाचल के तत्तापानी और नैना देवी मंदिर को पंजाब के आनंदपुर साहिब और कीरतपुर साहिब से जोड़ेगा, जिसका अध्ययन प्रगति पर है। यह जानकारी उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दी। कोच्चि में आयोजित अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) की तीसरी बैठक में हिमाचल प्रदेश और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के बीच जल परिवहन को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की। यह उच्च स्तरीय बैठक क्रूज पोत इंपीरियल क्लासिक पर आयोजित की गई, जो देश में अंतर्देशीय जल परिवहन को मिल रही प्राथमिकता का प्रतीक है। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि देश की अधिकांश प्रमुख नदियां हिमाचल से निकलती हैं, जिससे राज्य की राष्ट्रीय जलमार्गों में अहम भूमिका बनती है। उन्होंने केंद्र सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहयोग बढ़ाने और पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रो-इलेक्ट्रिक कैटामारन जहाज उपलब्ध कराने का आग्रह किया। अग्निहोत्री ने कहा कि इस समझौते से न केवल जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रिवर क्रूज, धार्मिक पर्यटन, रोजगार सृजन और सतत विकास को भी नई गति मिलेगी।
