हिमाचल राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस प्रत्याशी के ऐलान के बाद भाजपा खोलेगी पत्ते, 2024 की जीत दोहराने की तैयारी

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हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने के साथ प्रदेश की राजनीति फिर गरमा गई है। भाजपा वर्ष 2024 की तरह इस बार भी कांग्रेस प्रत्याशी तय होने के बाद अपना दांव खेलेगी।

अगर कांग्रेस ने हिमाचल से बाहर का कोई चेहरा मैदान में उतारा, तो भाजपा चुनावी समीकरण को साधते हुए अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बनाने की तैयारी में है। भाजपा खेमे में इस बात पर विशेष नजर रखी जा रही है कि कांग्रेस स्थानीय चेहरा लाती है या बाहरी। यदि कांग्रेस ने प्रदेश से बाहर का उम्मीदवार घोषित किया तो इसे मुद्दा बनाकर भाजपा हिमाचल स्वाभिमान का कार्ड खेल खेलने की रणनीति पर काम करेगी। इसके तहत क्रॉस वोटिंग और असंतोष को हवा देने की कोशिश भी की जा सकती है।

कांग्रेस खेमे में संभावित असंतोष को भुनाने की रणनीति पर भाजपा काम कर रही है। कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर होने वाली खींचतान और क्षेत्रीय संतुलन के सवालों को भी भाजपा अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी। राजनीतिक हलकों में 2024 के राज्यसभा चुनाव का घटनाक्रम अभी भी चर्चा में है। उस चुनाव में 25 विधायक होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया था। क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक प्रबंधन ने तब चुनावी तस्वीर बदल दी थी। यही वजह है कि इस बार भी भाजपा किसी भी मौके को गंवाने के मूड में नहीं दिख रही।

कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए नाम तय करने में जुटा है। कांग्रेस चाहती है कि ऐसा चेहरा सामने आए जो न केवल विधायकों को एकजुट रखे, बल्कि विपक्ष को कोई मौका भी न दे। अंदरखाने क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन को लेकर चर्चाएं भी तेज हैं।

विधानसभा में संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में होने के बावजूद भाजपा की रणनीतिक सक्रियता मुकाबले को दिलचस्प बनाने की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का भी होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में जैसे ही कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा करेगी। हिमाचल की सियासत में नई सरगर्मी देखने को मिल सकती है।

सत्तारुढ़ कांग्रेस के पास वर्तमान में 40 विधायक हैं। भाजपा के विधायकों की संख्या 28 है। साल 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस के पास 40 ही विधायक थे। तब भाजपा के 25 और तीन निर्दलीय विधायक थे। उस दौरान क्रास वोटिंग होने से भाजपा और कांग्रेस के राज्यसभा प्रत्याशियों को बराबर वोट प्राप्त हुए थे। पर्ची के माध्यम से भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन की जीत हुई थी। इसके बाद छह कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों की सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उपचुनाव में कुल नौ सीटों में से कांग्रेस छह सीटें जीतकर दोबारा 40 के आंकड़े पर पहुंच गई है। भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं। उधर, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी स्तर पर चर्चा हो रही है। जल्द ही इस बाबत फैसला लिया जाएगा।

पिछली बार राज्य के बाहर से प्रत्याशी देकर धोखा खा चुकी कांग्रेस इस बार प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में बहुत संभलकर चलेगी। कांग्रेस से इस बार हिमाचल मूल के कांग्रेस नेता ही प्रत्याशी हो सकते हैं। बड़े नेता पर विचार हुआ तो आनंद शर्मा फिर से उम्मीदवार हो सकते हैं। प्रतिभा सिंह, कौल सिंह ठाकुर जैसे नाम भी दावेदारी में हो सकते हैं। किसी नए चेहरे पर भी दांव खेला जा सकता है।

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