हिमाचल में चिट्टा तस्करी पर सख्ती: पकड़े गए कर्मचारियों पर बिना विभागीय जांच होगी सीधी बर्खास्तगी

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हिमाचल में बढ़ती चिट्टा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार कड़े नियम बना रही है। अब चिट्टा तस्करी में पकड़े सरकारी कर्मचारी बिना विभागीय जांच के ही बर्खास्त होंगे। कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।

मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों-निगमों के एमडी, विश्वविद्यालयों के कुल सचिवों को भी पत्र भेजे गए हैं। आदेशों में यह भी कहा है कि विशेष परिस्थितियों में और तथ्यों की गहन जांच के बाद ही ऐसी कार्रवाई होगी। इसे मनमाने ढंग से लागू नहीं किया जाएगा। हर मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों व सांविधानिक प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा। सरकार के कार्मिक विभाग ने निर्देश में स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत चिट्टा तस्करी और ड्रग्स के दर्ज मामलों में नियमित विभागीय जांच के बिना भी सेवा से बर्खास्तगी या हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों-निगमों के प्रबंध निदेशकों, विश्वविद्यालयों के कुल सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राज्य में चिट्टा और ड्रग्स के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मादक पदार्थों के कब्जे, तस्करी, परिवहन, वित्तपोषण या सहयोग के आरोप में एफआईआर दर्ज होती है तो इसे अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि इन निर्देशों को सभी अधीनस्थ कार्यालयों तक व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए, जिससे कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

संविधान के अनुच्छेद 311(2)(ब) और केंद्रीय सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम 1965 के नियम 19 के तहत प्रावधान है कि यदि व्यावहारिक न हो कि नियमित विभागीय जांच कराई जाए तो सक्षम प्राधिकारी लिखित कारण दर्ज कर सीधे कार्रवाई कर सकता है। – संजय गुप्ता, मुख्य सचिव

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