हिमाचल में किसानों को बड़ी सौगात: 10 साल में मुफ्त मिलेंगे 1.20 करोड़ औषधीय पौधे, 300 नई ई-बसें भी खरीदेंगी सरकार

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डाबर कंपनी हिमाचल प्रदेश के किसानों को 12 लाख औषधीय पौधे हर साल देगी। इनमें अलग-अलग प्रजाति के एक-एक लाख पौधे होंगे। यह पौधे आगामी दस साल तक दिए जाते रहेंगे। सरकार ने डाबर कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) पर हस्ताक्षर किए। इसे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में मैसर्ज डाबर इंडिया लिमिटेड और मैसर्ज करण सिंह वैध सोलन के साथ साइन किया गया।

मंगलवार को राज्य सचिवालय में हुए इस समझौते के अनुसार मैसर्ज डाबर इंडिया लिमिटेड प्रदेश को दस साल में कुल एक करोड़ 20 लाख पौधे देगा। यह पौधे 10 साल तक कम से कम 10 लाख प्रति प्रजाति दिए जाएंगे। इन्हें किसानों को मुफ्त दिया जाएगा। इन पौधों को प्रदेश के पारिस्थितिकीय संतुलन को देखते हुए चयनित किया जाएगा। इससे ग्रीन कवर बढ़ेगा और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

हल्दी, अश्वगंधा, तुलसी के पौधे सोलन में उगाने का अलग समझौता : सोलन स्थित मैसर्स करण सिंह वैद्य के साथ हस्ताक्षरित दूसरे समझौता ज्ञापन (एमओए) के तहत पांच वर्षों की अवधि के लिए सोलन जिले में चुनिंदा औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण और मूल्य श्रृंखला विकास को बढ़ावा देने की परिकल्पना की गई है। इस समझौते के अंतर्गत छह प्राथमिकता प्राप्त प्रजातियों – हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी, तुलसी, चिरायता और हिमालयन जेंटियन की खेती आसपास की पंचायतों को लक्षित करते हुए की जाएगी। प्रारंभिक चरण में, 108 बीघा से अधिक भूमि पर कम से कम 225 महिला किसानों को शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी बढ़ावा दे रही है। इस वर्ष अप्रैल तक एचआरटीसी के बेड़े में लगभग 300 नई ई-बसें शामिल की जाएंगी। विभिन्न सरकारी विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। 38,000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने के लिए 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।  हिमाचल प्रदेश को 31 मार्च 2026 तक ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इसे आगे बढ़ाना होगा। राज्य में 2032 तक समृद्धशाली राज्य बनाने की तैयारी है।

ठोस आश्वासन नहीं मिला तो किशाऊ और रेणुका बांध जैसी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ेंगे: मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अपने वैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के लंबित बकाये के निपटारे के लिए ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक किशाऊ और रेणुका बांध जैसी आगामी परियोजनाओं पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्तायोग ने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के लिए न तो हां किया और न ही न किया है। आरडीजी के बारे में मंत्रिमंडल ने हाईकमान के सामने विचार रखे कि प्रदेश के साथ बहुत न्याय हो रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री से बात करनी थी, मगर वह सोमवार को बंगलूरू गई हैं। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल भवन में बगैर वारंट के रेड होना दुर्भाग्यपूर्ण है। न तो आवासीय आयुक्त को जानकारी दी गई और न ही उन्हें दी गई। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया तो इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। सुक्खू ने कहा है कि राज्यसभा के चुनाव के लिए काफी दिन हैं। इस पर हाईकमान फैसला लेगा। 

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