हिमाचल: शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को तुरंत पकड़ लेंगे पुलिस के एआई कैमरे

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अब एआई आधारित कैमरे ड्राइविंग स्टाइल से बता देंगे कि वाहन चालक नशे में है या नहीं। हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने 75 प्रमुख स्थानों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) स्थापित किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित इस व्यवस्था के तहत लगे स्मार्ट कैमरे चौबीस घंटे सड़कों पर नजर रख रहे हैं। इसके चलते यातायात नियम तोड़ने वालों की पहचान तेजी से हो रही है और चालान अपने आप दर्ज किए जा रहे हैं।

आईटीएमएस से जुड़े एआई कैमरे ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने, बिना हेलमेट दोपहिया चलाने, ट्रिपल राइडिंग, रेड लाइट उल्लंघन और लापरवाही से वाहन चलाने जैसे मामलों को तुरंत पकड़ रहे हैं। इस तकनीक की मदद से बड़ी संख्या में यातायात उल्लंघन के मामलों का पता लगाया गया है और बड़ी तादाद में चालान भी किए गए हैं।

इससे उन स्थानों पर भी प्रभावी निगरानी संभव हुई है, जहां हर समय पुलिस कर्मियों की तैनाती करना आसान नहीं होता। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने बताया कि एआई आधारित यह प्रणाली यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हो रही है। इससे कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है, जबकि इंसानी गलतियों और अनावश्यक विवादों की संभावना भी कम हुई है।

अब सड़क पर की गई हर गलती कैमरे में रिकॉर्ड हो रही है और उसका पूरा विवरण सीधे सिस्टम तक पहुंच रहा है। सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए हिमाचल पुलिस ने आधुनिक उपकरणों से लैस विशेष वाहनों को भी अपने बेड़े में शामिल किया है। इसके साथ ही एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया गया है, जिससे दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल तक पहुंचने का समय कम हुआ है। इसका फायदा गंभीर हादसों में घायल लोगों को समय पर सहायता मिलने के रूप में सामने आ रहा है।मंडी 85 हादसों के साथ सबसे अधिक दुर्घटना प्रभावित जिला

सड़क सुरक्षा प्रबंधन, डिजिटल पुलिसिंग, सार्वजनिक सेवा वितरण, पासपोर्ट सत्यापन तथा मादक पदार्थों और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के क्षेत्र में हिमाचल पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। एआई आधारित ट्रैफिक निगरानी व्यवस्था को प्रदेश में सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों की जान बचाना है।

हालांकि, तकनीक आधारित निगरानी और सख्त कार्रवाई के बावजूद सड़क हादसे प्रदेश के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इस वर्ष एक जनवरी से 31 मार्च के बीच हिमाचल प्रदेश में 539 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें मंडी जिला 85 हादसों के साथ सबसे अधिक दुर्घटना प्रभावित जिला रहा। यह आंकड़ा बताता है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस और तकनीक की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि वाहन चालकों को भी नियमों का पालन करते हुए जिम्मेदारी से वाहन चलाना होगा।

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