अस्पतालों की खींचतान में फंसा परिवार, नहीं मिला डेथ सर्टिफिकेट; जानें पूरा मामला

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नागरिक चिकित्सालय अर्की में पथरी के ऑपरेशन के बाद महिला की मौत होने से परेशान परिजन अब मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनके कभी आईजीएमसी शिमला तो कभी अर्की अस्पताल के चक्कर लग रहे हैं। मगर न तो आईजीएमसी मृत्यु प्रमाणपत्र दे रहा है और न ही अर्की अस्पताल। अर्की अस्पताल प्रशासन तर्क दे रहा है कि उन्होंने जिंदा महिला को रेफर किया था, जबकि आईजीएमसी प्रशासन का तर्क है कि यहां पर महिला के पहुंचने से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।

ऐसे में महिला की मृत्यु के करीब डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी परिजनों को अब तक मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया  है। महिला के पति हेमराज शर्मा ने बताया कि नागरिक चिकित्सालय अर्की में वह मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनकी पत्नी का मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा है। कहा कि यदि प्रशासन की तरफ से यही रवैया चलता रहा तो वह अनशन करेंगे या दुखी होकर वह आत्महत्या तक कर सकते हैं।

हेमराज शर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी की मृत्यु को करीब डेढ़ माह होने जा रहा है लेकिन अभी भी वह मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए कभी आईजीएमसी तो कभी अर्की के चक्कर काट रहे हैं। हेमराज ने बताया कि मंगलवार को निदेशक स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के लिए टीम आई थी। उन्हें भी बुलाया गया था और वह परिवार के अन्य लोगों के साथ अर्की अस्पताल आए थे। 3:00 बजे तक वह अस्पताल में बैठे रहे लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।

यह है मामला : मई में भूमती क्षेत्र के गांव चुनाड़ की महिला सीमा देवी पथरी का ऑपरेशन के लिए अर्की अस्पताल आई थी। इसके पश्चात उसे शिमला के आईजीएमसी रेफर किया गया था। इस बीच उसकी मौत हो गई थी। इस बीच जांच और राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप को लेकर सीमा के परिजन उनसे मिले थे।

पंचायत प्रमाणपत्र देती है। पंचायत प्रमाणपत्र नहीं देती तो लिखित रूप में चिकित्सा विभाग को शिकायत कर सकते हैं। –मुक्ता रस्तोगी, बीएमओ

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