
सरकारी बैठकों में घंटों की चर्चा, देर से शुरुआत और बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त होने वाली कार्यशैली अब बदलेगी। केंद्र सरकार ने नौकरशाही की कार्य संस्कृति में सुधार के लिए आईएएस अधिकारियों को लंबी बैठकों के बजाय नतीजों पर जोर देने को कहा है। इसके लिए भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने अधिकारियों के लिए प्रभावी बैठक संचालन की गाइडलाइन जारी की है। इसे हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी अपने सभी आईएएस अधिकारियों तक पहुंचा दिया है। हिमाचल सरकार के कार्मिक विभाग ने जारी आदेश में सभी आईएएस अधिकारियों को इस गाइडलाइन का अध्ययन करने और अपने कामकाज में अपनाने को कहा है। प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इन दिशानिर्देशों को शामिल करे ताकि भविष्य के प्रशासनिक अधिकारियों में बेहतर प्रबंधन कौशल विकसित हो सके।
कैबिनेट सचिव ने कहा है कि प्रशासनिक सेवा में वर्षों का अनुभव तभी सार्थक है जब अधिकारी हर साल अपने कामकाज में सुधार करें। केवल पुरानी आदतों के आधार पर काम करते रहने से प्रशासनिक दक्षता प्रभावित होती है। उन्होंने अधिकारियों से आत्ममंथन करने और रोजमर्रा के कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की अपील की है।
गाइडलाइन में बैठकों की संस्कृति बदलने पर जोर दिया गया है। इसमें कहा है कि किसी भी बैठक से पहले उसका उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए। यदि किसी मुद्दे का समाधान ई-मेल, फोन या अन्य माध्यमों से संभव है तो अनावश्यक बैठकें बुलाने से बचना चाहिए। बैठक बुलाने से पहले एजेंडा तय करना, संबंधित दस्तावेज पहले से भेजना और प्रतिभागियों को तैयारी का पर्याप्त समय देना जरूरी बताया गया है। बैठकों को अनावश्यक रूप से लंबा न खींचने और सामान्य परिस्थितियों में उन्हें 30 से 60 मिनट के भीतर समाप्त करने का प्रयास करने को कहा गया है।विरोधी राय भी सुनें, जूनियरों को बोलने दें
अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे बैठकों में केवल सहमति तलाशने के बजाय अलग राय रखने वालों को भी बोलने का अवसर दें। अधीनस्थ कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों की राय को महत्व देने तथा उन्हें खुलकर सुझाव रखने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।फैसले के साथ तय हो जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने बैठकों के बाद तैयार होने वाले मिनट्स को भी महत्वपूर्ण बताया है। गाइडलाइन के अनुसार हर बैठक के दो से तीन दिन के भीतर मिनट्स जारी होने चाहिए और उसमें यह स्पष्ट लिखा जाना चाहिए कि कौन-सा निर्णय लिया गया, उसे लागू करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और उसकी समयसीमा क्या होगी।
