
हिमाचल प्रदेश ने देश के सबसे बड़े औद्योगिक और निर्यात मंच बोर्ड ऑफ ट्रेड (बीओटी) की बैठक में राज्य के व्यापार, निर्यात और औद्योगिक विकास से जुड़े अहम मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया। शुक्रवार को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने प्रदेश की जरूरतों और प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र में डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशालय) के सैटेलाइट कार्यालय तथा ऊना में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क में एनआईपीईआर के सैटेलाइट कैंपस की स्थापना की मांग की।
उद्याेग मंत्री ने इन मांगों को उठाया
उद्योग मंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों के लिए ऊंची लॉजिस्टिक लागत निर्यात बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। ऐसे में रेल और परिवहन संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए। इससे बद्दी स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो पूरी तरह संचालित हो सकेगा और उद्योगों की परिवहन लागत में बड़ी कमी आएगी। उद्योग मंत्री ने बताया कि हिमाचल का निर्यात वर्ष 2003-04 में लगभग 500 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वर्ष 2024-25 में 20,414 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
यह प्रदेश में विकसित हुए औद्योगिक आधार, निर्यातोन्मुखी विनिर्माण और निवेश-अनुकूल नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की नई भारत औद्योगिक विकास योजना से पर्वतीय राज्यों को विशेष लाभ मिलेगा। योजना के तहत औद्योगिक क्लस्टरों और प्लग एंड प्ले सुविधाओं के लिए न्यूनतम भूमि आवश्यकता को 25 एकड़ किए जाने से हिमाचल में नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। चार नए औद्योगिक क्लस्टरों की डीपीआर अंतिम चरण में
उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयात प्रतिस्थापन और निर्यात वृद्धि के लिए विशेष रूप से बल्क ड्रग, एपीआई, डाटा सेंटर, आयुष एवं वेलनेस, वन आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर ध्यान दे रही है। ऊना का बल्क ड्रग पार्क भविष्य में देश का प्रमुख फार्मास्युटिकल विनिर्माण केंद्र बन सकता है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जीआई टैग और जिला आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को व्यापार मेलों, प्रदर्शिनियों और खरीदार-विक्रेता बैठकों के माध्यम से वैश्विक मंच उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश सरकार ने केंद्र को बताया कि सोलन के वाकनाघाट स्थित मझोल गांव, नालागढ़ के घीर-लखनपुर क्षेत्र, सिरमौर के काला अंब स्थित ओगली और ऊना के बीतन-टाहलीवाल क्षेत्र में प्रस्तावित चार औद्योगिक क्लस्टरों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अंतिम चरण में है और जल्द केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।जीआई टैग उत्पादों को मिलेगा नया बाजार, निर्यात बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर बनेंगी समितियां
बैठक में बताया गया कि हिमाचल के जीआई टैग उत्पादों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जिनमें हाल ही में सात नए उत्पाद शामिल हुए हैं। प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट्स पहल के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में डीजीएफटी के सहयोग से जिला निर्यात प्रोत्साहन समितियों का गठन किया जाएगा। ये समितियां जिला स्तर पर निर्यात की संभावनाओं की पहचान करेंगी, उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराएंगी और उद्यमियों की क्षमता वृद्धि में मदद करेंगी।
