
हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में 300 दिनों से शुगर कम करने और 170 दिनों से कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा उपलब्ध नहीं है। कई अन्य महत्वपूर्ण दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों पर दवाइयां महंगे दाम पर खरीदनी पड़ रही हैं। तीन दवाएं ऐसी हैं जो केवल सरकारी सप्लाई में आती हैं और निजी मेडिकल स्टोरों में नहीं मिलतीं।
29 जून की महालेखाकार (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अस्पताल के दवा भंडार में कई जीवनरक्षक और नियमित उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं 26 दिन से लेकर 300 दिन तक उपलब्ध नहीं रहीं। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वोग्लिबोज 300 दिन, डेसिरॉक्स 250 एमजी 255 दिन, फेनोफाइब्रेट 242 दिन, ओन्डासेट सिरप 166 दिन, इंजेक्शन फैक्टर-4 161 दिन, प्रेडनिसोलोन 149 दिन और एटोरिकॉक्सिब 137 दिनों से स्टॉक से बाहर हैं। डॉक्सोफिलिन भी 35 दिनों से उपलब्ध नहीं है। इन दवाओं का उपयोग मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा, एलर्जी, थैलेसीमिया, गंभीर संक्रमण और रक्तस्राव जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार में किया जाता है।
किस बीमारी के लिए कौन की दवा जरूरी और इसके दाम
फेनोफाइब्रेट 160 एमजी : रक्त में बढ़े ट्राइग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए, हृदय रोग के जोखिम को घटाने में। -160 रुपये प्रति पत्ता।
सिरप ओन्डासेट : उल्टी और मितली रोकने के लिए। विशेषकर ऑपरेशन, कीमोथेरेपी या संक्रमण के दौरान। -35 रुपये प्रति पत्ता।
डॉक्सोफिलिन : अस्थमा और सीओपीडी (फेफड़ों की बीमारी) में सांस लेने में राहत के लिए। -6 रुपये प्रति गोली।
वोग्लिबोज 0.3 एमजी : टाइप-2 मधुमेह के मरीजों में भोजन के बाद बढ़ने वाली शुगर को नियंत्रित करने के लिए। -15 रुपये प्रति गोली।
डेसिरॉक्स 250 एमजी : थैलेसीमिया और बार-बार रक्त चढ़ने वाले मरीजों में शरीर में अतिरिक्त आयरन कम करने के लिए। -केवल सरकारी सप्लाई में मिलती है।डेसिकॉक्स 500 एमजी : थैलेसीमिया और बार-बार रक्त चढ़ने वाले मरीजों में शरीर में अतिरिक्त आयरन कम करने के लिए। अधिक खुराक की जरूरत वाले मरीजों के लिए। -केवल सरकारी सप्लाई में मिलती है।
एटोरिकॉक्सिब 60 एमजी : गठिया, जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और अन्य सूजन व दर्द में। -12 रुपये प्रति गोली।
प्रेडनिसोलोन 20 एमजी : एलर्जी, अस्थमा, ऑटोइम्यून बीमारियों और गंभीर सूजन के इलाज में। -2 रुपये प्रति गोली।
एमॉक्सी 500 एमजी : बैक्टीरियल संक्रमण जैसे गले, फेफड़े, कान, त्वचा और मूत्र संक्रमण के इलाज में। -15 रुपये प्रति कैप्सूल।
इंजेक्शन फैक्टर-4 : रक्त का थक्का बनने में कमी (जैसे हीमोफीलिया या गंभीर रक्तस्राव) वाले मरीजों के उपचार में। -केवल सरकारी सप्लाई में मिलती है।
एचपीडीवीडीएमएस पोर्टल पर ऑर्डर स्वत: रद्द होना, रेट कॉन्ट्रैक्ट में दवाएं उपलब्ध न होना, महंगी दवाओं के लिए बजट की कमी और सप्लाई एजेंसियों की ओर से समय पर आपूर्ति नहीं होना इसके प्रमुख कारण रहे। कुछ दवाओं के विकल्प उपलब्ध कराए गए और कुछ की खरीद प्रक्रिया जारी है। –डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, टांडा मेडिकल कॉलेज
