हिमाचल: वेतन पुनर्निर्धारण मामले में एचआरटीसी को छह हफ्ते में फैसला लेने का आदेश, जानें पूरा मामला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पथ परिवहन निगम के एक ड्राइवर के वेतन पुनर्निर्धारण से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करते हुए निगम को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले के मेरिट पर सीधे टिप्पणी किए बिना याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को आदेश दिया गया है कि वे दो सप्ताह के भीतर अपनी मांगों और आपत्तियों को लेकर एचआरटीसी के समक्ष एक नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। एचआरटीसी प्रबंधन और सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन मिलने के बाद 6 सप्ताह के भीतर इस पर कानून और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लें।

याचिकाकर्ता अशोक कुमार सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद 16 अगस्त 2021 को पूर्व सैनिक कोटे के तहत एचआरटीसी में अनुबंध के आधार पर बतौर ड्राइवर भर्ती हुए थे। इसके बाद, 12 अक्तूबर 2023 से निगम ने उनकी सेवाओं को नियमित कर दिया था। विवाद तब शुरू हुआ जब एचआरटीसी ने 25 मार्च 2026 को एक कार्यालय आदेश जारी कर दिया। इस आदेश में कहा गया कि याचिकाकर्ता सैन्य बलों से विमुक्त कार्मिक नियमावली, 1972 के तहत तय मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।

इसके आधार पर निगम ने 12 अक्तूबर 2023 (नियमितीकरण की तिथि) से उनके वेतन को दोबारा तय कर दिया, जिससे उनके वेतनमान पर सीधा असर पड़ा।दलील दी कि निगम का 25 मार्च 2026 का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि इस कटौती से पहले याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। साथ ही तर्क दिया गया कि उनका मामला उच्च न्यायालय द्वारा दिलबाग सिंह बनाम एचआरटीसी मामले में दिए गए फैसले से पूरी तरह से कवर होता है।

शिक्षक बिक्रम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका की मंजूर
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता स्कूल शिक्षक बिक्रम सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर दिया है। पुलिस की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट और आरोपी के जांच में शामिल होने के रवैये को देखते हुए न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। मामला सुजानपुर पुलिस थाना (जिला हमीरपुर) से जुड़ा हुआ है।

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अदालत में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्षों के आधार पर कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी की ओर से की गई पूछताछ और तफ्तीश में स्कूल के शिक्षकों के खिलाफ किसी भी तरह की कोई शिकायत दर्ज होने का सबूत नहीं मिला है। अदालत ने इस बात को विशेष रूप से संज्ञान में लिया कि याचिकाकर्ता ने पुलिस जांच में पूरी तरह से सहयोग किया है और वह जांच प्रक्रिया में शामिल हो चुका है। इसी को आधार बनाते हुए अदालत ने 30 जून 2026 को जारी अंतरिम आदेश को स्थायी करते हुए याचिका को अंतिम रूप से मंजूर कर लिया।

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