
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता पर अब प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े मामले पर अंतिम निर्णय वित्तीय समिति एफसी की बैठक में लिया जाएगा। तब तक सभी प्रभावित आउटसोर्स कर्मचारी अपने-अपने विभागों में काम करते रहेंगे और उन्हें नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जाएगा।
विश्वविद्यालय में करीब 200 आउटसोर्स कर्मचारियों का करार 30 सितंबर को समाप्त हो गया था। करार खत्म होने के बाद कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई थी। कई विभागों में कामकाज प्रभावित होने की आशंका के बीच अब प्रशासन ने अंतरिम व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को कार्य पर बनाए रखने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के कार्यालयों, परीक्षा शाखा, पुस्तकालय, छात्रावास और तकनीकी इकाइयों में आउटसोर्स कर्मचारियों की अहम भूमिका है। अचानक सेवाएं रोके जाने से शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं। इसी को देखते हुए एफसी के अंतिम निर्णय तक कर्मचारियों से काम लिया जाएगा।
यह मामला हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों और वहां से आने वाले फैसले से भी जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एफसी का निर्णय हाईकोर्ट की दिशा-निर्देशों और राज्य सरकार की नीति को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। हाईकोर्ट से जो भी आदेश आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित मामला विश्वविद्यालय के समक्ष है। उन्होंने बताया कि यह विषय वित्तीय समिति की बैठक के एजेंडे में शामिल किया गया है। कुलसचिव ने स्पष्ट किया कि एफसी के निर्णय तक सभी आउटसोर्स कर्मचारी काम करेंगे।
