अनिल खाची बोले– अप्रैल में चुनाव संभव, राज्य सरकार जल्द करे रोस्टर फाइनल

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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट से आए फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने कहा कि मैं बड़ा भाई हूं। अधिकारियों के कार्यालय में आने पर उनकी राय भी जानी जाएगी। मिलकर समाधान निकाला जाएगा। हालांकि, पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के मामले को लेकर पहले भी मुख्यमंत्री और आयुक्त के बीच बातचीत हुई है। अनिल खाची ने कहा कि आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है। रोस्टर फाइनल हो, आगे का कार्य राज्य निर्वाचन आयोग का है। चुनाव की तैयारियां पूरी हैं। अप्रैल में चुनाव कराने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। फरवरी और मार्च में विधानसभा का सत्र और छात्रों की भी परीक्षा होना है। पुलिस सहित अन्य स्टाफ व्यस्त रहेगा। चुनाव के लिए 40 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगनी है। अप्रैल में कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जा सकता है।

31 जनवरी को पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल होना है पूरा
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों और जिला परिषद वार्डों का किया पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन
मामला हाईकोर्ट पहुंचा, चार से पांच बार हुई मामले की सुनवाई
इसी बीच पंचायती राज विभाग ने सात नई पंचायतों के गठन और कुल 74 पंचायतों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की
सीमाओं में बदलाव की रोक को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने आदर्श चुनाव आचार संहिता की धारा 12.1 लागू राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तैयार की गई वोटरलिस्ट में 56 लाख मतदाता है। आयोग ने मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दे दिया है।
हिमाचल सरकार वार्डों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन करने के बाद नया रोस्टर तैयार कर चुनाव कराने की तैयारी में है जबकि राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना को पंचायत चुनाव आधार मानते हुए तैयारियां की हैं। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद आयोग और सरकार की कसरत शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही कह चुका है कि जिन पंचायतों में दिक्कत है उन पंचायतों में बाद में भी चुनाव कराए जा सकते हैं। वार्डों का नए सिरे से पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन करने में समय ज्यादा लगेगा। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में पंचायतों की कुल संख्या 3,577 है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग में बैठकों का दौरा जारी रहा। हाईकोर्ट से आए फैसले के बाद सरकार ने इस मामले में कानूनी राय भी जानी। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने फैसले के चलते अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी तैयारियां करने को कहा है। चुनाव कराने के लिए कितना कार्य अभी तक लंबित है। इसकी जानकारी ली। राज्य निर्वाचन आयोग हिमाचल के हर जिले में एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में है। इसके पीछे आयोग ने तर्क दिया है कि जनवरी, फरवरी में बच्चों की परीक्षा है। ऐसे में अध्यापक व अन्य कर्मचारी व्यस्त रहते हैं। दूसरे पोलिंग स्टेशन के लिए स्कूल भी खाली चाहिए। ऐसे में हर जिले में एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार के महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा है कि सरकार कभी पंचायती राज चुनाव से पीछे नहीं हटी है। आपदा आने से पहले ही सरकार चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। हाईकोर्ट के फैसला के बाद उन्होंने कहा कि वह इसके बारे में सरकार के साथ चर्चा करेंगे। चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने के संबंध में फैसला लिया जाएगा। कोर्ट ने फैसले में जो टाइमलाइन तय की गई है, उसमें चुनाव करवाने में मुश्किल हो सकती है।

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