
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित हिमालयन ट्राउट फिश फार्म को हुए नुकसान के एवज में फार्म मालिक को 47.14 लाख का पर्यावरणीय मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मुआवजा हरिपुर नाले पर पुल निर्माण के दौरान अवैध रूप से मलबा डंप करने से हुए नुकसान के बदले दिया गया है। एनजीटी ने प्रतिवादी पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार को संयुक्त रूप से 47,14,000 की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। प्रतिवादियों को यह राशि दो महीने के भीतर जमा करनी होगी। इसके साथ ही राज्य विभाग के पास यह अधिकार होगा कि वह मुआवजे की इस राशि को संबंधित ठेकेदार से वसूल सकेगी।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल की पीठ ने यह फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग और उसके ठेकेदार ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 24 का उल्लंघन किया है। निर्माण कार्य के दौरान नाले में फेंके गए मलबे के कारण नदी का पानी प्रदूषित हुआ। निचले हिस्से में स्थित फिश फार्म में हजारों ट्राउट मछलियों के अंडों की मौत हो गईं। एनजीटी ने मत्स्य विभाग, राजस्व अधिकारियों, ग्राम पंचायत और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर यह फैसला दिया है। इन रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि निर्माण गतिविधियों के कारण पर्यावरण और फिश फार्म को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
