बिलासपुर एम्स में नई ईईजी मशीन, बच्चों को इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा चंडीगढ़-दिल्ली

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गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों के लिए राहत की खबर है। एम्स बिलासपुर के पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) विभाग में जल्द ही 64-चैनल की अत्याधुनिक वीडियो ईईजी और पॉलीसोम्नोग्राफी मशीन स्थापित होने जा रही है। इस मशीन के आने के बाद अब बच्चों को दिमागी बीमारियों और नींद से जुड़े विकारों के इलाज के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अभी तक प्रदेश में उपलब्ध साधारण मशीनों से जटिल मामलों की पहचान मुश्किल होती थी, लेकिन यह नई तकनीक दिमाग के हर सूक्ष्म सिग्नल को पकड़ने में सक्षम होगी। इस मशीन के साथ हाई-डेफिनिशन कैमरे जुड़े होंगे। जब किसी बच्चे को दौरा पड़ेगा, तो यह मशीन न केवल उसके दिमाग की तरंगों को रिकॉर्ड करेगी, बल्कि उसी पल शरीर में होने वाले शारीरिक बदलावों का वीडियो भी बनाएगी। इससे डॉक्टरों को यह समझने में आसानी होगी कि मिर्गी का प्रकार क्या है और दवा का डोज कितना रखना है। साधारण ईईजी में कम सेंसर होते हैं, जिससे दिमाग के कुछ हिस्से छूट जाते हैं। 

एम्स की इस नई मशीन में 64 चैनल होंगे, जो दिमाग के एक-एक हिस्से की मैपिंग करेंगे। मशीन में विशेष तौर पर स्लीप एनालिसिस की सुविधा जोड़ी गई है। अगर कोई बच्चा सोते समय सांस लेने में तकलीफ (एपनिया), खर्राटे लेने या सोते हुए चलने जैसी बीमारी से पीड़ित है, तो यह मशीन रात भर उसकी ऑक्सीजन, हृदय गति और दिमाग की हलचल को मॉनिटर कर सही बीमारी पकड़ेगी। अकसर ईईजी के दौरान मरीज को तारों के जाल में बंधकर एक जगह बैठना पड़ता है। लेकिन एम्स द्वारा मंगाई जा रही इस मशीन का इलेक्ट्रोड बॉक्स पोर्टेबल है। यानी जांच के दौरान बच्चा कमरे में थोड़ा-बहुत हिल-डुल भी सकेगा, जिससे वह डरेगा नहीं और जांच के नतीजे भी बेहतर आएंगे। वर्तमान में इस स्तर की 64-चैनल वीडियो ईईजी जांच निजी अस्पतालों में 10,000 से 25,000 रुपये में होती है। एम्स में यह मशीन लगने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को न के बराबर खर्च पर यह सुविधा मिल सकेगी। 

संस्थान ने इसके साथ ही एक विशेष ईईजी रूम भी तैयार करने की योजना बनाई है, जहां मरीजों को घर जैसा माहौल मिले। मशीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर होगा, जो खुद डॉक्टर को सिग्नल देगा कि दिमाग के किस हिस्से में गड़बड़ी है। इससे रिपोर्टिंग में मानवीय गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। साथ ही अगले 10 वर्षों तक इस मशीन के रखरखाव की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। यह 64-चैनल वीडियो ईईजी मशीन गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की पहचान में मील का पत्थर साबित होगी। जल्द ही इसे विभाग में स्थापित कर मरीजों के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

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