46 लाख की धोखाधड़ी: माइनिंग बिजनेस के नाम पर ठगे गए निवेशक, 10 साल बाद शुरू होगा ट्रायल

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माइनिंग (खनन) कारोबार में निवेश कराने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी के मामले में करीब एक दशक बाद उत्तराखंड की महिला के खिलाफ ट्रायल चलेगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने देहरादून निवासी मुख्य आरोपी वंदना अग्रवाल के खिलाफ अगली सुनवाई तक आरोप तय (चार्ज फ्रेम) करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आदेश दिया है। इस महिला पर जिला सिरमौर के पिता और बेटे से खनन व्यवसाय शुरू करने के नाम पर 46 लाख की रकम ऐंठने के आरोप हैं।

मामला वर्ष 2016 को आपराधिक विश्वासघात, साजिश और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज है। नाहन निवासी शिकायतकर्ता के अनुसार उनका बेटा देहरादून में दुकान चलाता था। दुकान के पास रहने वाले वंदना और उसके पति से उसके बेटे के घनिष्ठ संबंध बन गए। इसी दौरान दंपती ने खनन व्यवसाय शुरू करने का प्रस्ताव दिया और निवेश करने पर अच्छा मुनाफा होने का भरोसा दिलाया।

शिकायत है कि भरोसे में लेकर अलग-अलग किस्तों में करीब 46 लाख रुपये आरोपी महिला के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। न तो कोई खनन व्यवसाय शुरू किया गया और न ही रकम लौटाई गई। विरोध करने पर धमकाने तक के आरोप लगाए गए। पुलिस जांच के दौरान बैंक दस्तावेज खंगाले गए। इसमें पुष्टि हुई कि शिकायतकर्ता की ओर से भेजी गई रकम आरोपी के खाते में जमा हुई। आगे की पड़ताल में सामने आया कि धनराशि व्यवसाय में लगाने के बजाय निजी खर्चों में इस्तेमाल की गई। जांच में कार खरीदने समेत अन्य व्यक्तिगत खर्चों के तथ्य भी उजागर हुए। अब अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने (चार्ज फ्रेम) के लिए मामले को 16 जून की तिथि को सूचीबद्ध किया है। इसके बाद मामले का ट्रायल शुरू होगा।

महिला की डिस्चार्ज अर्जी खारिज, पिता को राहत
प्रकरण में नामजद दूसरे आरोपी 67 वर्षीय सुशील कुमार (महिला के पिता) को अदालत से राहत मिली है। केवल खाते में धन हस्तांतरण को साजिश का पर्याप्त आधार नहीं माना गया। इस आधार पर उन्हें आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया गया। वहीं, अदालत ने वंदना की डिस्चार्ज अर्जी खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर धन के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। सिविल विवाद बताकर आपराधिक कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता।

युवती की मौत और मारपीट मामले में आरोपी को जमानत नहीं
हमीरपुर। सदर थाना के तहत सलासी क्षेत्र में शराब के नशे में चर्चित वाहन दुर्घटना और मारपीट की घटना के बाद युवती की मौत से जुड़े मामले में आरोपी अजय कुमार को राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर सचिन रघु की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के आचरण को देखते हुए उसे जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है। इस मामले में अभी तक पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने घायल युवती को अस्पताल पहुंचाते समय गलत नाम बताकर पहचान छिपाने की कोशिश की और उसे अपनी बहन बताया।

वहीं, बाद में अन्य साथी आरोपी सागरदीप के साथ अस्पताल से फरार हो गया और खून से सने कपड़े धोकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। अदालत ने माना कि आरोपी ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन को गुमराह किया है। आरोपियों ने बीते आठ जनवरी को सलासी में निजी बस को रोक कर बस कंडक्टर नरेश कुमार और अन्य के साथ मारपीट की तथा घटना के बाद मौके से भाग गए। न्यायालय ने कहा कि आरोपी को जमानत देने पर गवाहों को धमकाने और जांच प्रभावित होने की प्रबल आशंका है। आरोपी अजय सेना में जवान है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिका पर की गई टिप्पणियां केवल इस आवेदन के निपटारे तक सीमित हैं और केस की मेरिट पर प्रभाव नहीं डालेंगी। यह आदेश छह फरवरी को सुनाया गया।

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