
गंभीर मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाना डॉक्टरों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। खासकर वह मरीज जो वेंटिलेटर के सहारे होते हैं। उनके लिए कुछ पलों की चूक जानलेवा साबित हो सकती है। अब एम्स बिलासपुर में ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर मरीजों की सांसों की डोर नहीं टूटने देगा। अस्पताल के आईसीयू से ऑपरेशन थियेटर, सीटी स्कैन, एमआरआई, एंबुलेंस या अन्य जांच कक्ष तक ले जाते समय अब मरीज की सांसों पर लगातार नियंत्रण बना रहेगा। इससे ट्रांसफर के दौरान जोखिम कम होगा और मरीज की स्थिति स्थिर रखी जा सकेगी। यह ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर वयस्क और बाल रोगियों दोनों के लिए उपयोगी होगा।
इसमें मशीन में सांसों की गति, ऑक्सीजन स्तर, प्रेशर और वॉल्यूम की निगरानी की सुविधा होगी। किसी भी आपात स्थिति में अलार्म सिस्टम तुरंत संकेत देगा। विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर संक्रमण, सड़क हादसे, हार्ट अटैक या अन्य जटिल मामलों में यह उपकरण जीवनरक्षक साबित हो सकता है। कई बार मरीजों को उच्च उपचार के लिए अन्य अस्पताल रेफर करना पड़ता है। ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर की मदद से एंबुलेंस में भी लगातार वेंटिलेशन सपोर्ट दिया जा सकेगा। इससे रास्ते में मरीज की हालत बिगड़ने की आशंका कम होगी। उपकरण पर वारंटी के साथ व्यापक रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि मशीन हमेशा सुचारु रूप से कार्य करती रहे। अस्पताल प्रशासन ने 98 प्रतिशत अपटाइम सुनिश्चित करने की शर्त रखी है।
एम्स में ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर की उपलब्धता से गंभीर मरीजों की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इससे इलाज की प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनेगी। उल्लेखनीय है कि एम्स बिलासपुर में मरीजों के लिए हर प्रकार के उपचार की सुविधा प्रदान करने की कवायद जारी है। जबसे बिलासपुर में एम्स खुला है। इसका सबसे ज्यादा लाभ प्रदेश के निचले जिलों के लोगों को मिल रहा है। लोगों को पीजीआई चंडीगढ़ या बाहरी राज्यों के अस्पतालों में जाने से निजात मिल गई है। एम्स में ही प्रदेश के मरीजों को अब हर प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे मरीजों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
