
जिला मुख्यालय नाहन के ऐतिहासिक दिल्ली गेट के समीप शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले स्थानीय युवाओं ने एक छबील का आयोजन किया। इस मजेदार नाम के बैनर ने वहां से गुजरने वाले हर राहगीर और बाजार आने-जाने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
बढ़ती हुई भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच इस छबील का आयोजन लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया। कार्यक्रम के दौरान नाहन के स्थानीय युवाओं ने पूरी लगन के साथ सड़क से गुजरने वाले हर छोटे-बड़े व्यक्ति को रोककर बड़े ही प्यार से ठंडा-ठंडा नींबू पानी पिलाया। चिलचिलाती धूप में इस तरह ठंडे और मीठे पानी की व्यवस्था देखकर राहगीरों के चेहरे खिल उठे और उन्हें गर्मी से बड़ी राहत मिली।
आखिर ये कॉकरोच जनता पार्टी है क्या?
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक आंदोलन के रूप में हुई। यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी को मीम्स और हास्य के जरिए व्यक्त करने वाला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है।
शुरुआत कैसे हुई?
तारीख: 16 मई 2026 (सीजेआई के बयान के अगले दिन)।
संस्थापक: अभिजीत दीपके 30 वर्षीय, बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र और पूर्व में आम आदमी पार्टी के साथ काम कर चुके राजनीतिक संचार रणनीतिकार।
कारण: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने 15 मई 2026 को एक सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं/आलोचकों को कॉकरोच और पैरासाइट्स कहा। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा नौकरी नहीं पाते और सोशल मीडिया/मीडिया पर हमला करते हैं। (बाद में सीजेआई ने सफाई दी कि यह सभी युवाओं के लिए नहीं था।)
अकाउंट ब्लॉक होने के बाद नया हैंडल
बता दें कि 21 मई को सीजेपी का मूल एक्स हैंडल भारत में ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद संगठन ने नया हैंडल कॉकरोच इज बैक शुरू किया, जिसके वर्तमान में 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। यह आंदोलन अपने अनोखे प्रतीकवाद और डिजिटल रणनीति के लिए चर्चा में है। समर्थक कॉकरोच की पहचान को सरकार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखते हैं।
