
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि काउंसलिंग के समय किसी उम्मीदवार का अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र पुराना या अमान्य पाया जाता है, तो उसकी उम्मीदवारी को सीधे खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में चयन समिति का यह कर्तव्य है कि वह उम्मीदवार को नया प्रमाणपत्र पेश करने के लिए उचित समय दे। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने विभाग की कार्रवाई को कानूनन गलत ठहराते हुए निर्देश दिए है कि याचिकाकर्ता को वेटरनेरी फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति दी जाए।उन्हें यह नियुक्ति उसी तारीख से दी जाएगी, जब उनसे कम अंक वाले उम्मीदवार को चुना गया था।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से नियुक्त कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाया जाएगा। याचिकाकर्ता को केवल नोशनल (सांकेतिक) तौर पर वरिष्ठता का लाभ मिलेगा और वास्तविक वित्तीय लाभ फैसले की तारीख के बाद से लागू होंगे। अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति या ओबीसी का दर्जा किसी व्यक्ति को जन्म से मिलता है। यह कोई ऐसी योग्यता नहीं है जो समय के साथ बदलती या घटती-बढ़ती रहे। यदि काउंसलिंग कमेटी को प्रमाण पत्र की वैधता पर कोई संदेह था, तो विवेक का तकाजा यह था कि याचिकाकर्ता को नया प्रमाण पत्र लाने के लिए कुछ समय दिया जाता।
उल्लेखनीय है कि पशुपालन विभाग ने अनुबंध के आधार पर ग्राम पंचायत वेटनरी असिस्टेंट से वेटनरी फार्मासिस्ट के पदों को भरने के लिए आवेदन मांगे थे। इनमें ओबीसी ओपन श्रेणी के लिए 27 पद आरक्षित थे। याचिकाकर्ता जो इसी श्रेणी से संबंध रखती है को भी काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था।
अंतिम मेरिट सूची में प्राथी के 64 अंक थे, जबकि उनके वर्ग में 63.75 अंक पाने वाली एक अन्य महिला का चयन कर लिया गया, लेकिन याचिकाकर्ता का नाम सूची से गायब था।पशुपालन विभाग ने अदालत में तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की योग्यता पर कोई विवाद नहीं है। हालांकि, काउंसलिंग के समय उन्होंने जो दो ओबीसी प्रमाण पत्र (एक मायके पक्ष और एक ससुराल पक्ष का) पेश किए थे, वे सरकारी नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक पुराने होने के कारण अमान्य थे। इसलिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।हाईकोर्ट ने चमियाना अस्पताल की 700 मीटर सड़क के रखरखाव का जिम्मा एनएचआई को सौंपा
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के नजदीक चमियाना अस्पताल को जाने वाली 700 मीटर सड़क के रखरखाव का जिम्मा एनएचआई को सौंप दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपने ठेकेदार के माध्यम से इस प्रभावित हिस्से का रखरखाव सुनिश्चित करे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि इस 700 मीटर के पैच पर एनएचएआई के फोरलेन निर्माण कार्य के कारण लगातार भारी मशीनरी और कच्चे माल से लदे ट्रकों की आवाजाही हो रही है। इस वजह से लोक निर्माण विभाग की ओर से की गई मरम्मत टिक नहीं पा रही है और सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। अदालत ने साथ ही कहा कि इस मार्ग के कुछ हिस्से काफी सुनसान हैं, इसलिए सड़क पर लाइटिंग (स्ट्रीट लाइट) की व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए।
इसके अतिरिक्त, अदालत को सूचित किया गया कि क्षेत्र में 600 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग के लिए सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और प्रस्तावित पार्किंग परिसर की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। महाधिवक्ता ने बताया कि मौके पर मौजूद 24 पेड़ों को काटने का मुद्दा सैद्धांतिक रूप से सुलझा लिया गया है। स्वीकृत प्रक्रिया के तहत इन पेड़ों को पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से काटा जाएगा और बाद में इन्हें वन निगम को सौंप दिया जाएगा। बिजली बोर्ड की ओर से अदालत को आश्वासन दिया कि जैसे ही सड़क चौड़ीकरण के लिए जगह उपलब्ध होगी, सड़क के किनारे नए बिजली के खंभे स्थापित कर दिए जाएंगे। वर्तमान में बिजली की लाइनों को सड़क चौड़ीकरण और टारिंग के काम के साथ-साथ ही शिफ्ट किया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता की ओर से कोर्ट में दाखिल हलफनामे और तस्वीरों से साफ हुआ है कि मौके पर जेसीबी और भारी मशीनों से मिट्टी हटाने का काम जारी है। वाहनों की सुचारू आवाजाही के लिए घाटी वाली तरफ एक सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया गया है। उल्लेखनीय है कि आईजीएमसी से कुछ विभाग सुपर स्पेशलिटी चमियाना अस्पताल में शिफ्ट किए गए हैं। लेकिन अस्पताल को जाने वाली सड़क इतनी तंग और क्षतिग्रस्त है जिसमें मरीजों और तीमदारों को बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। सड़क पर ना तो स्ट्रीट लाइटों का प्रबंध है और ना ही पार्किंग के लिए उचित सुविधाएं हैं। सरकार ने हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि इन समस्याओं को सुलझाने के लिए भरपूर प्रयास किया जा रहा है।
