एम्स बिलासपुर में बढ़ेंगे 960 नए बेड, पीजीआई और दिल्ली के अस्पतालों पर घटेगा मरीजों का दबाव

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प्रदेश के सबसे बड़े केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थान एम्स बिलासपुर में मरीजों की बढ़ती संख्या और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं की जरूरत को देखते हुए संस्थान अब दूसरे चरण के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इस चरण में अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के लिए 960 बिस्तरों करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद अस्पताल के पीछे नए इंडोर ब्लॉक और अन्य भवनों का निर्माण शुरू होगा।

बिलासपुर एम्स का निर्माण शुरुआत से ही तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहला चरण पूरा होने के बाद अस्पताल वर्तमान में 750 बिस्तरों के साथ सेवाएं दे रहा है। दूसरे चरण में बिस्तर क्षमता बढ़ाने के साथ इंडोर सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जबकि तीसरे चरण के पूरा होने पर संस्थान की कुल क्षमता 2250 बिस्तर तक पहुंच जाएगी। इसके लिए पूरा मास्टर प्लान पहले से तैयार है और अस्पताल के पीछे पर्याप्त भूमि भी चिह्नित की जा चुकी है। दरअसल, एम्स शुरू होने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए बिलासपुर पहुंच रहे हैं।

ओपीडी और भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई विभागों में मरीजों को जांच और ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल का विस्तार मरीजों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। दूसरे चरण के पूरा होने के बाद न केवल भर्ती के लिए अधिक बिस्तर उपलब्ध होंगे, बल्कि कई नई सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार का रास्ता भी खुलेगा। इससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली के बड़े अस्पतालों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। प्रदेश के लोगों का समय और लाखों रुपये का खर्च भी बचेगा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने की कवायद:

 अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने की कवायद भी जारी है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में नियमित फैकल्टी नहीं होने के कारण भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है और जल्द ही साक्षात्कार होंगे। वहीं कार्डियोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में अभी सीमित फैकल्टी कार्यरत है। हालांकि सीनियर रेजिडेंट सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण ओपन हार्ट सर्जरी जैसी जटिल हृदय शल्य चिकित्सा अभी शुरू नहीं हो सकी है। एम्स के दूसरे चरण के पूरा होने के साथ नए विभाग, अतिरिक्त वार्ड, आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे बिलासपुर एम्स केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा संस्थानों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

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