
हिमाचल प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों के बीच संक्रमण के कारणों और नए मामलों से जुड़े आंकड़े चिंता भी बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में सामने आए एचआईवी मामलों में 19 फीसदी संक्रमण सिरिंज साझा करने से जुड़ा पाया गया है। वहीं एकीकृत एसटीआई, एचआईवी, टीबी और हेपेटाइटिस बी-सी परीक्षण एवं उपचार अभियान के तहत नए मामलों की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पीटरहॉफ शिमला में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश में एचआईवी संक्रमण, जागरूकता और रोकथाम से जुड़े आंकड़े सामने रखे गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने की।
363 से बढ़कर 1000 हुए नए मामले
कार्यक्रम में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एकीकृत एसटीआई, एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस बी और सी परीक्षण एवं उपचार अभियान के तहत 2021-22 में 363 नए मामले सामने आए थे। वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1000 हो गई। इस तरह तीन वर्षों की अवधि में नए मामलों में करीब 175 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।वहीं वर्ष 2025-26 में सामने आए मामलों के कारणों के विश्लेषण में 19 फीसदी संक्रमण सिरिंज साझा करने से संबंधित पाया गया। यह आंकड़ा खास तौर पर नशीली दवाओं के सेवन के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली साझा सिरिंज से संक्रमण के जोखिम को सामने लाता है।
तीन जिले एड्स से सुरक्षित जिलों में
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देश में एड्स जैसी बीमारी से सुरक्षित माने जाने वाले 15 जिलों में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सोलन शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश के तीन अन्य जिले भी सक्षम श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए जांच, उपचार और जागरूकता को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
95-95-95 लक्ष्य में हिमाचल देश में आगे
एचआईवी और एड्स की रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र के यूएनएड्स 95-95-95 लक्ष्य को हासिल करने में हिमाचल प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। कार्यक्रम में बताया गया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के मामले में हिमाचल देश में अग्रणी राज्यों में है। इस लक्ष्य के तहत एचआईवी से संक्रमित लोगों की पहचान, संक्रमित लोगों को उपचार से जोड़ने और उपचार के बाद वायरस को नियंत्रित रखने पर जोर दिया जाता है।
2.86 लाख परिवारों तक पहुंची जागरूकता
प्रदेश में एचआईवी संक्रमण को लेकर जागरूकता अभियान को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की मदद ली जा रही है। 1000 आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदेश के पांच जिलों के 2440 गांवों में 2.86 लाख परिवारों तक एचआईवी से संबंधित जागरूकता संदेश पहुंचाया गया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को संक्रमण के कारणों, बचाव के उपायों, जांच और उपचार की सुविधाओं के बारे में जानकारी देना है।
लड़ाई सिर्फ वायरस के खिलाफ नहीं : जनारथा
विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई केवल वायरस के खिलाफ नहीं है, बल्कि अज्ञानता, डर, गलत धारणाओं, कलंक और भेदभाव के खिलाफ भी है। उन्होंने समाज में एचआईवी संक्रमित लोगों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक रवैया अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से लोगों में बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है, ताकि संक्रमित व्यक्ति सामाजिक भेदभाव के डर के बिना जांच और उपचार करा सके।
‘स्वच्छ हिमाचल-स्वस्थ हिमाचल’ का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने ‘स्वच्छ हिमाचल-स्वस्थ हिमाचल’ के संकल्प के साथ कार-बिन बैग अभियान के तीसरे चरण का भी शुभारंभ किया। अभियान के माध्यम से स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। एचआईवी रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान को युवाओं तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि युवा वर्ग को संक्रमण के कारणों और बचाव के तरीकों की सही जानकारी देकर जोखिम को कम किया जा सकता है।
आंकड़े क्या बताते हैं?
सुरक्षित जिलों में शामिल हिमाचल के जिले: किन्नौर, लाहौल-स्पीति और सोलन
2021-22 में नए मामले: 363
2024-25 में नए मामले: 1000
2021-22 से 2024-25 तक वृद्धि: करीब 175%
2025-26 में सिरिंज साझा करने से जुड़े मामले: 19%
एचआईवी जागरूकता से जुड़े परिवार: 2.86 लाख
जागरूकता अभियान में आशा कार्यकर्ता: 1000
अभियान से जुड़े गांव: 2440
