
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की बसों में बिना टिकट यात्रियों से किराया वसूलने और गबन के आरोपी परिचालक की बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने याचिकाकर्ता की सेवा बहाली और नियमितीकरण की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि गबन में शामिल कर्मचारी को नियमित करना उसके गलत कार्यों को बढ़ावा देने जैसा होगा। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने अनुशासनिक और अपीलीय प्राधिकरणों के बर्खास्तगी के फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इन्कार कर दिया। याचिकाकर्ता एचआरटीसी में समेकित वेतन पर टीएमपीए के रूप में कार्यरत था।
चेकिंग के दौरान पाया गया कि बस में यात्री बिना टिकट सफर कर रहे थे, जबकि याचिकाकर्ता उनसे किराया वसूल चुका था। एक मामले में बस ओवरलोड होने के बावजूद याचिकाकर्ता ने यात्रियों को टिकट जारी नहीं किए, जिन्होंने चेकिंग पॉइंट तक 8 किलोमीटर का सफर तय कर लिया था। अनुशासनिक प्राधिकरण ने अपने आदेश में ऐसे कई अन्य मामलों का भी उल्लेख किया था।
याचिकाकर्ता ने बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बर्खास्तगी के आदेशों को रद्द करने तथा सेवा में बहाल कर नियमित करने की मांग की। अदालत ने कहा कि गबन करने वाले के लिए बर्खास्तगी के अलावा और क्या सजा होगी। अदालत यह समझने में असमर्थ है कि गबन में शामिल व्यक्ति के साथ उसकी सेवाओं की समाप्ति के अलावा और क्या व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि ऐसे कर्मचारी को विभागीय कार्रवाई के बजाय नियमितीकरण से पुरस्कृत किया जाए, तो यह उसके गबन के कृत्य को बढ़ावा देने जैसा होगा।
