
बर्फ गिरे या मूसलाधार बारिश हो। पहाड़ दरकें या ब्यास उफान पर आए। मंडी-मनाली फोरलेन पर सफर करने वालों को अब मौसम की मार से बचाने की तैयारी है। पहाड़ से गिरने वाले पत्थरों को रोकने के लिए जहां संवेदनशील ढलानों को मजबूत किया जाएगा, वहीं ब्यास के कटाव से सड़क को बचाने के लिए नदी किनारे सुरक्षा दीवारें और अन्य बचाव कार्य किए जाएंगे। फोरलेन को हर मौसम में सुरक्षित और सुचारु रखने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करीब 4256.97 करोड़ रुपये खर्च करेगा। मंडी से करीब 30 किलोमीटर दूर दवाड़ा से झलोगी तक 800 मीटर और झलोगी से थलौट की ओर 550 मीटर हिस्से में पहाड़ी को स्थिर करने के लिए 601.36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
एनएचएआई ने मुख्यालय से इसकी मंजूरी मांगी है। इन दोनों हिस्सों में करीब 1350 मीटर पहाड़ी पर केबल एंकरिंग की जाएगी। इससे पहाड़ी की कमजोर चट्टानों और ढलान को स्थिर करने में मदद मिलेगी और सड़क पर पत्थर गिरने का खतरा कम किया जा सकेगा। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर रोजाना औसतन करीब नौ हजार वाहन गुजरते हैं। पर्यटन सीजन में यह संख्या और बढ़ जाती है।
ऐसे में पहाड़ी से पत्थर गिरना या भूस्खलन होने पर यातायात के साथ यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। एनएचएआई ने ऐसे 150 संवेदनशील स्थान चिन्हित किए हैं। इनमें से 46 स्थानों पर सुरक्षा कार्य ठेकेदारों को अवार्ड किए जा चुके हैं जबकि बाकी स्थानों के लिए अनुमान मुख्यालय भेजे गए हैं। दवाड़ा और झलोगी जैसे संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा कार्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यहां पहले भी पहाड़ी से चट्टानें गिर चुकी हैं। दवाड़ा में चट्टानों की चपेट में आकर फ्लाईओवर भी क्षतिग्रस्त हो चुका है
ऊपर पहाड़ से खतरा, नीचे ब्यास का कटाव
फोरलेन को सिर्फ ऊपर से गिरने वाली चट्टानों से ही नहीं बल्कि नीचे बह रही ब्यास नदी से भी खतरा है। बरसात में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ने पर किनारों का कटाव तेज हो जाता है। इससे सड़क के आसपास की जमीन और सुरक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए ब्यास किनारे 65 स्थानों पर नदी कटावरोधी कार्य किए जाएंगे।
इन स्थानों की कुल लंबाई करीब 19 किलोमीटर है। इन कार्यों पर करीब 1354.27 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनमें से 44 स्थानों पर 722.65 करोड़ रुपये के कार्य पहले ही अवार्ड किए जा चुके हैं। रायसन, डोहलूनाला, बिंदुधांक, कलाथ सब्जी मंडी और मनाली बाईपास में नदी संरक्षण के कार्य किए जाने हैं। यानी फोरलेन को एक तरफ पहाड़ से गिरने वाले पत्थरों से और दूसरी तरफ ब्यास के कटाव से बचाने की तैयारी है।
4256 करोड़ की सुरक्षा योजना
फोरलेन को पहाड़, नदी और भूस्खलन से सुरक्षित बनाने के लिए कुल 4256.97 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें करीब 876 करोड़ रुपये के सुरक्षा एवं स्थिरीकरण कार्य स्वीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा ढलान स्थिरीकरण, नदी सुरक्षा समेत अन्य कार्यों के लिए करीब 3380.91 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एनएचएआई मुख्यालय को भेजा गया है। इन कार्यों का मकसद संवेदनशील हिस्सों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना है, ताकि बारिश और बर्फबारी के दौरान सड़क पर बार-बार होने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।
झलोगी टनल का मुहाना 300 मीटर आगे होगा
झलोगी टनल के मुहाने पर वर्ष 2023 में शुरू हुआ भूस्खलन 2025 में बढ़ गया था। इसके तकनीकी आकलन के लिए ऑस्ट्रिया के विशेषज्ञ ने मौके का दौरा किया। विशेषज्ञ की पहली रिपोर्ट में मौजूदा प्रभावित मुहाने को बंद रखने और कुछ आगे सुरक्षित स्थान पर नया मुहाना खोलने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत 1400 मीटर लंबी झलोगी टनल करीब 1700 मीटर की हो जाएगी। मुहाना करीब 300 मीटर आगे करने से टनल को अस्थिर पहाड़ी से दूर रखा जा सकेगा। इससे भूस्खलन की स्थिति में टनल की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हणोगी में 50 करोड़ से मजबूत हो रही टनल
हणोगी के पास पहाड़ी दरकने से क्षतिग्रस्त नवनिर्मित टनल की मरम्मत का काम शुरू हो चुका है। एनएचएआई करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से दिन-रात काम करवा रहा है। टनल के करीब 24 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचा है। इसे मजबूत करने के लिए केबल एंकरिंग और स्टील आर्क लगाए जा रहे हैं। इससे पहाड़ी के दबाव और भविष्य में होने वाली हलचल से टनल को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
नई सुरंगों से मिलेगी सुरक्षा
बढ़ते यातायात और पहाड़ी क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए भविष्य में नई सुरंगें बनाने का भी प्रस्ताव है। टी-2, टी-3, टी-4, टी-5, पंडोह बाईपास और चेनज 201 व 203 पर ट्विन-ट्यूब सुरंगें बनाने की योजना है। चेनज 208 यानी 9 माइल में वायाडक्ट बनाने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 3786 करोड़ रुपये है। चेनज 201, 203 और पंडोह बाईपास की सुरंगों का प्रस्ताव आवश्यक स्वीकृति के लिए एनएचएआई मुख्यालय भेजा जा चुका है।
