त्योहारों से पहले महंगाई की मार: शिमला में गुड़-शक्कर के थोक भाव 82 रुपये किलो, रिटेल में 90 तक पहुंचा दाम

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त्योहारों के सीजन से पहले ही राजधानी के बाजारों में चीनी के बाद अब गुड़ और शक्कर के दामों ने भी रफ्तार पकड़ ली है। गंज बाजार स्थित अनाज मंडी में गुड़ और शक्कर के दामों में एक हफ्ते में ही 30 रुपये प्रतिकिलो तक उछाल आया है। एक हफ्ते पहले जहां दोनों 52 रुपये प्रतिकिलो थोक भाव में बिक रहे थे वहीं सोमवार को इनका दाम 82 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया।

खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को इसके लिए करीब 90 रुपये प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं। अगस्त से शुरू हुए त्योहारों के सीजन में रक्षाबंधन और गणेश चतुर्थी जैसे पर्वों के चलते मिठाइयों की मांग बढ़ने लगी है। मिठाई बनाने में चीनी और गुड़ की खपत बढ़ने से बाजार में इनकी मांग बढ़ी है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में मांग और बढ़ने पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक श्रीधर ने कहा कि गंज बाजार में शक्कर और गुड़ की आपूर्ति अंबाला तथ चंडीगढ़ से आती है। इन दिनों बाहरी राज्यों से ही आपूर्ति महंगे दामों में आ रही है। इसके अलावा अन्य कारोबारियों के अनुसार, इस सीजन में गन्ने की कम पैदावार को कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। उत्पादन कम होने से बाजार में गुड़ और चीनी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से भी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव आया है।

एथेनॉल उत्पादन का भी असर
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे एथेनॉल उत्पादन को एक कारण बताया जा रहा है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए गन्ने के रस और सिरप का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है। इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कच्चे माल पर असर पड़ने की बात कही जा रही है।

दाम बढ़ने से बिगड़ गया है बजट
महंगाई सिर्फ सामान के दाम नहीं बढ़ाती बल्कि आम परिवार का बजट और बचत दोनों बिगाड़ देती है। चीनी के बाद अब गुड़ और शक्कर के दाम बढ़ने से घर का बजट बिगड़ गया है। सरकार को इसके दाम कम करने के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए। –गीता, झंझीड़ी निवासी

एक की जगह आधा किलो ले जा रही हूं शक्कर
आने वाले त्योहारी सीजन के लिए बाजार में शक्कर खरीदने आई थी लेकिन दाम देखकर अब एक किलो की जगह आधा किलो ही खरीद कर ले जा रही हूं। यह ऐसी चीजें हैं जो सालभर में हर घर में उपयोग होती है। महंगाई बढ़ने से यह चीजें आम आदमी से दूर हो रही है। – आशा राणा, सब्जी मंडी निवासी

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