
हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में किसानों का फूलों की खेती की ओर रुझान बढ़ा है। लेकिन पुष्प उत्पादकों को प्रदेश में कारोबारी ही नहीं मिल रहे। उनको मजबूरन फूल दिल्ली भेजने पड़ रहे हैं। फूल वहां भेजने में उत्पादकों से कारोबारी 10 फीसदी कमीशन और 200 रुपये प्रति बॉक्स किराया वसूल रहे हैं। परवाणू में प्रदेश की पहली फूल मंडी खोली गई थी, लेकिन व्यापारी न मिलने से यह पिछले दो वर्षो से बंद पड़ी है। इसका नुकसान उत्पादकों को झेलना पड़ रहा है। सोलन जिला में सोलन, चायल, डांगरी, देवठी, कंडाघाट, धर्मपुर, कोठी देवरा, पाट्टी, बसाल, पपलोड, देहरा, समेत अन्य क्षेत्रों में कारनेशन, लिलियम समेत अन्य फूलों की खेती की जाती है। इसे यहां के किसान सीधे दिल्ली और चंडीगढ़ बेच रहे हैं। मशरूम और टमाटर के लिए पहचान बना चुके सोलन में अब लोगों का रुझान फूलों की खेती की तरफ बढ़ने लगा है। जिला भर में पिछले कुछ सालों के दौरान फूलों की खेती की ओर तेजी से रुझान बढ़ा है। अब 20 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर फूलों की खेती हो रही है। इसमें कई प्रकार के ऑर्नामेंटल फूलों की खेती की जा रही है, जिससे बागवानों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है। लेकिन प्रदेश में फूल के खरीदार ही नहीं हैं।
पुष्प उत्पादक मदन ठाकुर, राजीव ठाकुर, पुष्पेंद्र, राजेंद्र, शेर सिंह, प्रेम सिंह, चायल निवासी भानु प्रकाश, यशपाल, चेतन, कंडाघाट निवासी मुनीष कुमार ने बताया कि फूल दिल्ली, चंडीगढ़ की बड़ी मंडियों में ग्रेड कर भेजा जा रहा है। यहां पर दस फीसदी कमीशन देना पड़ता है। इसके अलावा दिल्ली तक 40 फूल कली को पहुंचाने के लिए 200 रुपये किराया लगता है। प्रदेश में फूल के खरीदार नहीं है। परवाणू में मंडी खोली गई थी, लेकिन यहां पर फूल खरीदार ही नहीं आए। अब मजबूरन सीधे दिल्ली, चंडीगढ़ समेत अन्य राज्यों को फूल भेजे जा रहे हैं। जिले के सोलन में 3.5 हेक्टेयर, कंडाघाट में 3.14 हेक्टेयर, धर्मपुर में 11.9 हेक्टेयर, कुनिहार में 1.5 हेक्टेयर, नालागढ़ में 1.8 हेक्टेयर भूमि पर सजावटी फूलों की खेती की जा रही है। इनमें कारनेशन, गुलाब, मैरीगोल्ड, लिलियम, अलेस्ट्रोमिरिया, गुलदाउदी, ऑरकिड, शैफलेश, पेचिया, हबीसकस, क्यूशिया, जैरेनियम, एग्लोनिया समेत अन्य किस्म के फूलों की पैदावार की जा रही है।
दोची फार्म हाउस में 80 के दशक में उगाए गए विदेशी फूल
चायल के दोची में महाराजा पटियाला का फार्म हाउस है। यहां 80 के दशक में विदेशी फूल उगाए गए। दोची के साथ लगते महोग गांव के लोगों ने भी यहां फूल देखे तो उन्होंने भी फूलों की खेती करने का मन बनाया। महोग गांव के प्रगतिशील किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर फूलों की खेती शुरू की। इसमें गांव के आत्मस्वरूप, मदन चौहान, बाबू राम, प्यारेलाल, ओमप्रकाश को सफलता मिली। पहले पहल किसानों ने खुले में ही फूलों की खेती की। अब पॉलीहाउस में भी फूलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने यहां अपना सेंटर भी खोला है। भले ही सोलन में फूल उत्पादन शुरू हुआ है, लेकिन फूल उत्पादन में जिला सिरमौर अव्वल है।
50 हेक्टेयर बढ़ी फूलों की खेती
हिमाचल प्रदेश में इस समय करीब 800 हेक्टेयर जमीन पर करीब 5000 हजार कृषक फूलों की खेती कर रहे हैं। ये पिछले साल के मुकाबले करीब 50 हेक्टेयर ज्यादा है। इसका कारोबार सालाना 100 करोड़ से ज्यादा का हो रहा है। सोलन जिला के चायल क्षेत्र से शुरू हुई फूलों की खेती अब प्रदेश के कई हिस्सों में फैलने लगी है। यहां की जलवायु के कारण फूलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। हिमाचल में बेमौसमी फूलों की खेती होती है, जिसकी पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व दिल्ली की मंडियों में भारी मांग रहती है।