
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े और आधुनिक अस्पताल एम्स बिलासपुर में अब मरीजों को न केवल बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि अस्पताल के भीतर की हवा भी पूरी तरह शुद्ध और कीटाणु रहित होगी। एम्स प्रबंधन ने संस्थान के फेफड़ों यानी हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग सिस्टम को नया जीवन देने के लिए एक योजना तैयार की है। करीब तीन करोड़ सैंतीस लाख से अधिक के बजट से पूरे परिसर के कूलिंग और एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम का कायाकल्प किया जा रहा है।
अस्पताल ने इस पूरे सिस्टम को दो संवेदनशील हिस्सों में बांटा है, ताकि कहीं भी चूक की गुंजाइश न रहे। पहला मोर्चा हाई साइड 1.33 करोड़ की लागत से मुख्य चिलर प्लांट और भारी मशीनों का जिम्मा सीधे कॅरिअर कंपनी के विशेषज्ञों को सौंपा जा रहा है। ये मशीनें अस्पताल की ठंडक का मुख्य स्रोत हैं। दूसरा मोर्चा लो साइड 2.04 करोड़ के बजट से उन उपकरणों का रखरखाव होगा जो ओटी और वार्डों तक हवा पहुंचाते हैं। इसमें 30 विशेषज्ञों की टीम तैनात रहेगी। मरीजों की जान से कोई खिलवाड़ न हो, इसके लिए मशीनों को अब केवल ऑटो मोड पर नहीं छोड़ा जाएगा।
एम्स प्रबंधन ने फैसला लिया है कि 30 कुशल तकनीकी कर्मचारियों की एक फौज 24 घंटे अस्पताल में तैनात रहेगी। यह टीम शिफ्टों में काम करेगी और हर एक घंटे में वेंटिलेशन की रिपोर्ट कंट्रोल रूम को देगी। इनमें मेकेनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल तकनीशियन और बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम के एक्सपर्ट शामिल होंगे। संक्रमण रोकने के लिए एम्स ने इस बार अभूतपूर्व सख्ती दिखाई है। अनुबंध के मुताबिक एचईपीए फिल्टर टेस्ट में ओटी और आईसीयू में हवा को छानने वाले फिल्टरों का साल में एक बार इंटीग्रिटी टेस्ट होगा। ओटी वैलिडेशन में हर ओटी का वैज्ञानिक परीक्षण होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां की हवा 100 फीसदी शुद्ध है। यूवी लैंप और स्क्रबर्स में हवा को शुद्ध करने के लिए विशेष अल्ट्रावायलट किरणों और एयर स्क्रबर्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
एम्स प्रशासन ने ठेकेदारों पर लगाम कसने के लिए कड़े दंड नियम बनाए हैं। यदि अस्पताल के किसी हिस्से में कूलिंग खराब होती है और उसे 4 घंटे के भीतर ठीक नहीं किया गया, तो ठेकेदार पर 5000 प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा। वहीं, ओटी वैलिडेशन में देरी पर 20,000 तक की कटौती की जाएगी।
