हिमाचल में अतिरिक्त निर्माण हुआ महंगा, मंजूरी के लिए देना होगा 3000–7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर

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नगर एवं ग्राम योजना (टीसीपी) विभाग ने हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। विभाग की ओर से 27 फरवरी 2026 को जारी दो अधिसूचनाएं शुक्रवार को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गईं। इन अधिसूचनाओं के माध्यम से प्रीमियम एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) और ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता को अनिवार्य कर दिया गया है। इन संशोधनों का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में नियोजित विकास को बढ़ावा देना और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना है।

नगर एवं ग्राम योजना (18वां संशोधन) नियम, 2026 के तहत अब रियल एस्टेट परियोजनाओं को अतिरिक्त प्रीमियम एफएआर खरीदने की सुविधा दी गई है। इसके लिए शुल्क की दरें निर्धारित की गई हैं। 0.25 तक (250 वर्ग मीटर) अतिरिक्त एफएआर के लिए 3000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 0.25 से 0.50 तक 5000 रुपये और 0.50 से 0.75 तक 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क देना होगा। यह सुविधा केवल उन परियोजनाओं के लिए लागू होगी जिनका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है या जो निर्माणाधीन हैं। जिन परियोजनाओं को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा।

इसके अलावा 17वें संशोधन के तहत 750 वर्ग मीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाले व्यावसायिक, सार्वजनिक और रियल एस्टेट भवनों के लिए हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (एचपीईसीबीसी) 2018 का पालन अनिवार्य किया गया है। इसके दायरे में होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक परिसर शामिल होंगे। साथ ही सभी नए व्यावसायिक और सार्वजनिक भवनों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट बनाना भी अनिवार्य किया गया है। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया है। इसके तहत मान्यता प्राप्त संस्थाओं से ग्रीन रेटिंग प्राप्त करने वाले भवनों को 0.25 अतिरिक्त एफएआर मुफ्त दिया जाएगा। हालांकि यदि कोई परियोजना निर्धारित ग्रीन रेटिंग हासिल नहीं कर पाती है तो उसे सामान्य शुल्क से दस गुना अधिक दंड देना होगा।

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