
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र पुराना होने के आधार पर किसी का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता है। प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख चाहे जो भी हो, व्यक्ति उसी श्रेणी से संबंधित रहेगा। पुराना होने से याचिकाकर्ता का स्टेटस नहीं बदल जाएगा। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से नामांकन खारिज करने के आधार को पूरी तरह से अनुचित ठहराया। अदालत ने आदेश रद्द करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के नामांकन पर दोबारा फैसला लेने को कहा है। यदि नामांकन स्वीकार होता है, तो उम्मीदवार को चुनाव चिह्न अलॉट किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से 29 अप्रैल 2026 को अधिसूचित पंचायतीराज संस्थाओं का चुनावी शेड्यूल किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होना चाहिए।नामांकन रद्द करने के मामले में महिला को चुनाव याचिका दायर करने की दी स्वतंत्रत
प्रदेश हाईकोर्ट ने नालागढ़ के तहत पंचायत दभोटा में ओबीसी महिला के लिए आरक्षित प्रधान पद के लिए महिला उम्मीदवार का नामांकन रद्द करने के मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसका जन्म हरियाणा में हुआ था और वह जन्म से झीनवर जाति से संबंध रखती है, जो हरियाणा में अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में अधिसूचित है। याचिकाकर्ता का विवाह जिला सोलन की तहसील नालागढ़ की पंचायत दभोटा में हुआ है। उनके पति भी उसी जाति से हैं, जो हिमाचल प्रदेश में भी ओबीसी वर्ग में आती है। वर्तमान में याचिकाकर्ता का नाम संबंधित ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज है। रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से 13 मई 2026 को उनका नामांकन पत्र खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि 8 मई 2026 के स्पष्टीकरण और हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत याचिकाकर्ता के पास वैधानिक उपाय के तहत चुनाव याचिका दायर करने के विकल्प उपलब्ध हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने कोर्ट से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। उल्लेखनीय है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने राज्य सरकार के 8 मई 2026 के एक स्पष्टीकरण और तहसीलदार की ओर से 5 मई 2026 को जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता का नामांकन रद्द कर दिया था।
अतिक्रमण मामले में खारिज किया एआरओ का फैसला
प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिक्रमण मामले में झाकड़ी पंचायत से प्रधान पद के उम्मीदवार का एआरओ की ओर से नामांकन रद्द करने के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने सहायक निर्वाचन अधिकारी को नामांकन पर नए सिरे से कानूनी फैसला लेने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने शिमला जिले की पंचायत झाकड़ी से प्रधान पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था। 12 मई को एक शिकायतकर्ता प्रतिवादी ने आपत्ति दर्ज कराई कि याचिकाकर्ता के पिता ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ है। इस आपत्ति के आधार पर एआरओ ने याचिकाकर्ता का नामांकन रद्द कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने साल 2021 में इसी पंचायत से उपप्रधान का चुनाव जीता था। उस समय भी शिकायतकर्ता ने अतिक्रमण के इन्हीं आरोपों को लेकर उनके चुनाव को चुनौती दी थी। लंबी सुनवाई के बाद 19 जुलाई 2024 को उप-मंडलीय अधिकारी रामपुर बुशहर ने उस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शिकायतकर्ता अतिक्रमण के आरोपों का कोई पुख्ता दस्तावेजी या राजस्व सबूत पेश नहीं कर पाई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा 29 अप्रैल 2026 को घोषित पंचायती राज संस्थाओं का चुनावी शेड्यूल इस आदेश से किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगा।
