हिमाचल के 13 आयुष अस्पतालों में शुरू होगा स्पा थेरेपी कोर्स, युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर

Spread the love

हिमाचल प्रदेश में आयुष अस्पतालों में अब युवा स्पा थेरेपी यानी पंचकर्मा तकनीशियन कोर्स भी कर सकेंगे। इसके लिए आयुष विभाग की ओर से दस जिलों में कोर्स को शुरू करने का फैसला लिया है। कोर्स के लिए आयुष अस्पतालों में ही पढ़ाई होगी। इससे पहले आरजीजीपीजी आयुष कॉलेज एवं अस्पताल पपरोला (कांगड़ा) और क्षेत्रीय आयुष अस्पताल छोटा शिमला में कोर्स करवाया जाता था लेकिन अब 10 जिलों में कोर्स करवाने का फैसला लिया है।

विभाग की ओर से 256 सीटें 13 अस्पतालों और पपरोला कॉलेज में दी है। इसमें 11 आयुष अस्पतालों में 16-16, जिला आयुष अस्पताल चंबा में 20, क्षेत्रीय आयुष अस्पताल शिमला में 24 और पपरोला कॉलेज में 36 सीटें निर्धारित की गई है। इससे युवा आसानी से अपने ही जिले में कोर्स कर सकेंगे। कोर्स की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। विभाग के अनुसार जिला आयुष अस्पताल बिलासपुर, हमीरपुर, धर्मशाला (कांगड़ा), कुल्लू, मंडी, नाहन, सोलन और ऊना में कोर्स की सुविधा दी गई है। इसी के साथ आयुष अस्पताल देहरा (कांगड़ा), शिमला और नालागढ़ (सोलन) के साथ आरजीजीपीजी आयुष कॉलेज एवं अस्पताल पपरोला (कांगड़ा) में भी युवा कोर्स कर सकते हैं।

प्रशिक्षुओं को स्वरोजगार का मौका
कोर्स शुरू होने से प्रशिक्षुओं को स्वरोजगार का मौका भी मिलेगा। एक साल बाद प्रशिक्षु अपने स्तर पर सेंटर आसानी से खोल सकेंगे। इससे प्रशिक्षु आजीविका भी कमा सकेंगे। हाल ही में पपरोला कॉलेज और छोटा शिमला से कोर्स कर निकले प्रशिक्षुओं को कई जगहों पर बेहतर नौकरी के अवसर भी प्रदान हुए हैं।  स्पा थेरेपी (पंचकर्मा) तकनीशियन को आयुष विभाग की ओर से मुख्य विधियां सिखाई जाएगी। इसमें बस्ती जिससे यह गठिया, जोड़ दर्द, कब्ज, गैस, अपच और दूसरी वात से जुड़ी बीमारियों में फायदेमंद होता है। विरेचन जो लिवर, स्किन, आंतों और पित्ताशय से जुड़े रोगों जैसे पीलिया आदि को ठीक करने में मदद मिलती है।

रक्तमोक्षण विधि त्वचा से जुड़े रोग जैसे सोरायसिस और एक्जिमा में फायदा करती है। साथ ही पीलिया और सिरदर्द में उपयोगी है।नस्य प्रोसेस से माइग्रेन, सिरदर्द, साइनसाइटिस, पुरानी सर्दी और श्वसन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। वमन विधि में कफ से जुड़ी दिक्कतों जैसे अस्थमा, ऐसिड रिफ्लक्स और एलर्जी में मदद करती है। इसमें शरीर से एक्स्ट्रा बलगम और गंदगी निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियों की मदद से उल्टी कराई जाती है। शिरोधारा विधि स्ट्रेस, चिंता, नींद की समस्या और माइग्रेन के लिए फायदेमंद है। इन सभी के बारे में जानकारी दी जाएगी।

प्रदेश के 13 आयुष अस्पतालों और पपरोला कॉलेज में स्पा थेरेपी (पंचकर्म) कोर्स शुरू किया जा रहा है। इससे पंचकर्म सीखने में युवाओं को मदद मिलेगी। ये कोर्स एक वर्ष का रहेगा। इसके लिए अस्पतालों और कॉलेजों में सीटें निर्धारित कर दी है। –रोहित जमवाल, निदेशक, आयुष विभाग शिमला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *