
हिमाचल के शहरों को बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन से लैस करने के लिए स्वीकृत 111.88 करोड़ रुपये का स्वच्छता मिशन सरकारी फाइलों में फंस गया है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)-2.0 के तहत जल शक्ति विभाग के मंडलों और स्थानीय शहरी निकायों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन एंड डाइवर्जन (गंदे पानी के नालों को साफ करना) प्रणालियों को मजबूत करने के लिए 111.88 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन अब तक इनमें से केवल 8.93 करोड़ यानी 7.99 फीसदी ही खर्च हो पाए हैं।
जल शक्ति विभाग की जनवरी 2026 तक की प्रोजेक्ट स्टेटस एंड एक्सपेंडिचर रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 की शुरुआत अक्तूबर 2021 में हुई थी और इसमें हिमाचल की 43 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। पांच वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृत यह मिशन अक्तूबर 2026 में खत्म होना है। एक ओर करोड़ों रुपये की परियोजनाएं मंजूर हैं, वहीं स्वीकृत बजट का करीब 92 फीसदी हिस्सा अभी खर्च होने की बाट जोह रहा है। राज्य में मिशन के तहत कुल 43 परियोजनाएं सूचीबद्ध हैं। इनमें से केवल 14 परियोजनाओं को ही फंड जारी हुआ है, जबकि 29 परियोजनाओं को अभी तक वित्तीय शुरुआत का इंतजार है।विभाग के सभी प्रोजेक्टों की समीक्षा कर ली गई है। सभी परियोजनाओं को मौजूदा वित्तीय वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है और जहां भी कोई बाधा है, उसे दूर कर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।– अंजू शर्मा, प्रमुख अभियंता, जलशक्ति विभाग
22 परियोजनाएं अभी भी तकनीकी मंजूरी के फेर में
मिशन की धीमी रफ्तार का सबसे बड़ा कारण तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें हैं। कुल 43 परियोजनाओं में से 22 अभी टेक्निकल सैंक्शन अंडर प्रोसेस हैं। यानी इन परियोजनाओं में निर्माण शुरू होने से पहले की मूलभूत मंजूरी भी पूरी नहीं हो पाई है। सोलन की 5.25 करोड़ और 5 करोड़ रुपये की दो परियोजनाएं, बद्दी की 4 करोड़ रुपये की परियोजना, ठियोग की 3 करोड़ रुपये की परियोजना तथा ऊना के टाहलीवाल और अंब की योजनाएं इसी प्रक्रिया में अटकी हैं। श्री नैना देवी जी की 60 लाख, डलहौजी की 3 करोड़ रुपये और रिवालसर की 1.85 करोड़ रुपये की परियोजनाएं टेक्निकल बिड स्टेज पर हैं। इन परियोजनाओं में अभी ठेकेदारों का चयन तक पूरा नहीं हुआ है।
अवार्ड के बाद भी धर्मशाला-मंडी में शून्य खर्च
सबसे बड़ा विरोधाभास बड़े शहरों की परियोजनाओं में सामने आ रहा है। धर्मशाला के लिए 3 करोड़ रुपये और मंडी के लिए 7.20 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हैं। दोनों का काम अवार्ड भी हो चुका है, लेकिन अब तक एक रुपये का फंड जारी नहीं हुआ और खर्च भी शून्य है। श्री नैना देवी जी की 2.50 करोड़ रुपये, हमीरपुर की 2.50 करोड़ रुपये और देहरा की 3 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की भी यही स्थिति है। इन सभी में काम अवार्ड होने के बावजूद वित्तीय प्रगति शून्य बनी हुई है।
छोटे निकायों ने बड़े शहरों को पीछे छोड़ा
जहां बड़े नगर निगमों की परियोजनाएं फाइलों में अटकी हैं, वहीं कुछ छोटे नगर निकायों ने उपलब्ध राशि का बेहतर इस्तेमाल किया है। प्रोजेक्ट स्टेटस एंड एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के मुताबिक पालमपुर की 3 करोड़ रुपये की परियोजना में 100 फीसदी प्रगति हुई है।सुंदरनगर की 2.0782 करोड़ रुपये की परियोजना में से 2.0725 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। रामपुर की 1.68 करोड़ रुपये की परियोजना में से 1.49 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सुन्नी की 1 करोड़ 9 लाख रुपये की परियोजना में 100 फीसदी राशि खर्च हो चुकी है।
