
हिमाचल प्रदेश सरकार नई औद्योगिक नीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इस नीति को तैयार करते समय पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड की औद्योगिक नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है। अब वनई नीति में उद्योगों को बाहरी राज्यों की तुलना में कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी और टैक्स में भी दो से तीन फीसदी तक की राहत देने का फैसला लिए जाने की संभावना है। सरकार का मानना है कि बिजली की ऊंची लागत उद्योगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रही है। सस्ती बिजली मिलने से उत्पादन लागत कम होगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे नए उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों का भी हिमाचल की ओर रुझान बढ़ने की उम्मीद है।
नई औद्योगिक नीति में मशीनरी खरीद पर प्रोत्साहन देने के बजाय उत्पादन आधारित प्रोत्साहन पर अधिक जोर रहेगा। प्रस्ताव है कि जो उद्योग में उत्पादन तैयार कर हिमाचल के बाजार में बिक, उन उद्योगपतियों को स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स में दो से तीन फीसदी तक राहत दी जाएगी। इससे उद्योगों को अधिक उत्पादन करने और कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।निवेशकों को उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी मिले, इसी उद्देश्य से विभिन्न विभागों से सुझाव लेकर नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है।
नई औद्योगिक नीति में ग्रीन एनर्जी, रोजगार सृजन और निवेश प्रोत्साहन जैसे बिंदुओं को भी प्रमुखता दी जा रही है। नीति का उद्देश्य हिमाचल को उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक निवेश केंद्रों में शामिल करना है। सरकार को उम्मीद है कि नई नीति लागू होने के बाद प्रदेश में घरेलू और बाहरी निवेश बढ़ेगा, उद्योगों का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
उद्योगपतियों को राहत देने की तैयारी में सरकार
प्रदेश सरकार नई औद्योगिक नीति में उद्योगपतियों को राहत देने की तैयारी में है। यह इसलिए ताकि हिमाचल में ज्यादा से ज्यादा निवेशक आए। हिमाचल से कोई उद्योग बाहर न जाएं, इसको लेकर भी सरकार कुछ न कुछ इंसेटिव देगी। उधर, उद्योगपति प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति पर आस लगाए हुए है।
