Chamba Bus Accident: टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान घायल महिला ने तोड़ा दम, चलुंज हादसे में आठ मौतें

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चंबा-बैरागढ़ मार्ग पर चलुंज मोड़ के समीप हुए निजी बस हादसे में गंभीर रूप से घायल एक और महिला की मौत हो गई है। महिला ने टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान धर्मो पत्नी जस्सा, निवासी गांव घुलेई के रूप में हुई है। महिला की मौत के बाद हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।

हादसे में घायल अन्य लोगों का उपचार चंबा मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। गंभीर रूप से घायल धर्मो को प्राथमिक उपचार के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। वहां उपचार के दौरान रविवार को उनकी मौत हो गई।

मौके पर सात लोगों की हुई थी मौत
चंबा-बैरागढ़ मार्ग पर चलुंज मोड़ के पास गत दिन निजी बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 11 अन्य यात्री घायल हुए थे।हादसे के बाद घायलों को पहले तीसा अस्पताल ले जाया गया। यहां से उन्हें उपचार के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। गंभीर हालत को देखते हुए धर्मो को टांडा मेडिकल कॉलेज भेजा गया था।

इलाज के दौरान नहीं बच सकीं धर्मो
टांडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की निगरानी में धर्मो का उपचार चल रहा था, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस हादसे में मृतकों की संख्या आठ पहुंच गई।

प्रशासन ने दी सहायता राशि
प्रशासन की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को जरूरी सहायता राशि प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई है। नायब तहसीलदार ने टांडा मेडिकल कॉलेज से एक और महिला की मौत की सूचना मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि महिला की मौत के बाद हादसे में मृतकों की संख्या आठ हो गई है।

अपनी बच्चियों को मां की मौत की खबर देने की नहीं हिम्मत जुटा पा रहे पिता
अस्पताल के बिस्तर पर चार मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाश रही हैं और सामने खड़ा पिता अपने भीतर का तूफान छिपाकर उन्हें दिलासा दे रहा है।


बच्चियों को अब तक यह मालूम नहीं कि जिस मां के आने का वे इंतजार कर रही हैं, उसका अंतिम संस्कार हो चुका है। पत्नी को खोने के बाद चार घायल बेटियों के बीच खड़ा पिता अब मौत की यह खबर सुनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।

रविवार को मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन बच्चियां रो-रो कर मां को पुकार रही थीं। वहां उन्हें मजबूर पिता यही ढांढस बंधा रहा था कि चुप हो जाओ, मां जल्दी आ जाएगी। जब मोती राम को बस दुर्घटना में अपनी पत्नी नीलमा की मौत की सूचना मिली तो वह पांगी में मजदूरी कर रहे थे।

वहां से काम छोड़कर टैक्सी में सवार होकर चंबा के लिए निकले। शाम को तीसा पहुंचे, वहां पत्नी का अंतिम संस्कार किया। उसके बाद घायल चारों बच्चियों के पास मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। इन बच्चियों को यह बताने की उनकी हिम्मत नहीं हो पा रही है कि अब उनकी मां इस दुनिया में नहीं है।

बच्चियों का रो-रो कर बुरा हाल है। मोती राम से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक उन्होंने बच्चियों को उनकी मां के मरने के बारे में नहीं बताया है। उनके लिये परिस्थिति काफी नाजुक बनी हुई हैं। एक तरफ पत्नी की मौत हो चुकी है और दूसरी तरफ चारों बेटियां घायल हैं। उनके स्वस्थ होने के बाद ही मां के मरने के बारे में बताया जाएगा।

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