भरयाल में कचरे के ढेर में एक महीने से धधक रही आग, जहरीले धुएं ने लोगों की बढ़ाई मुश्किलें

Spread the love

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के भरयाल में कचरे के पहाड़ में भड़की आग को लेकर शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के दिए आदेशों को नगर निगम ने ठेंगा दिखा दिया है। मंत्री ने सख्त लहजे में निगम अधिकारियों को मौके पर जाकर आग बुझाने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं दिखा। आग बुझाने के कार्यों की निगरानी के लिए सोमवार को कोई भी अधिकारी मौके पर नजर नहीं आया। दोपहर 3:00 बजे तक निगम के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। इसके बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों को भी जब अधिकारी यहां पर नहीं मिले तो वे मायूस लौट गए। शहर से आठ किलोमीटर की दूरी पर भरयाल कूड़ा संयंत्र है। शहर से रोजाना निकलने वाला 80 से 90 टन कचरा यहां ठिकाने लगाया जाता है। इससे यहां बिजली बनती है। हालांकि, इससे पहले यहां कचरे को इकट्ठा किया जाता है। मौके पर कचरे के बड़े पहाड़ लग गए हैं।

अब कचरे के पहाड़ में आग लगने से दिन-रात धुआं उठ रहा है। इस धुएं ने भरयाल गांव में रहने वाले लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में शहरी विकास विभाग मंत्री ने भी निगम के अधिकारियों को कई अहम निर्देश जारी किए थे लेकिन आग बुझाने तो दूर काम की निगरानी के लिए भी दिन भर यहां पर कोई अधिकारी नहीं आया। सोमवार को जब मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया गया तो क्षेत्र में धुएं का प्रकोप जारी रहा। मौके पर आए भरयाल के ग्रामीणों ने भी कहा कि वे जब भी घरों का दरवाजा खोलते हैं तो कूड़े से उठा धुआं सीधे घर के अंदर आ जाता है। इसके अलावा कुछ ही दूरी पर बने पानी के स्रोत दूषित हो गए हैं। लोगों ने कहा कि आग को बुझाने के लिए मिट्टी डाली जा रही है। लेकिन यह भी कारगार साबित नहीं हो रही है। मिट्टी तो ट्रक से गिरते ही लुढ़क कर दूसरी ओर जा रही है। ग्रामीणों ने दोटूक कहा कि वे गंदगी को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस नरक में उनका जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों की इस समस्या का सरकार व नगर निगम प्रशासन ने समाधान नहीं किया तो वह चक्का जाम करने से गुरेज नहीं करेंगे।

भरयाल गांव का नाम सुनते ही लोग यहां के लिए अपनी बेटियों की शादियां करने से डरते हैं। इसके अलावा बाहर पढ़ने वाले बच्चों के साथ भी इलाके का नाम सुनने के बाद असामान्य व्यवहार किया जाता है। -अशोक, चालक

टुटु, विजयनगर और मज्याठ के सैकड़ों लोग मार्निक वॉक और योग करने के लिए यहां आते थे। अब यहां की ओर लोग देखना तक मुनासिब नहीं समझते है। सरकार की वजह से यह हुआ है। -राम गोपाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *