
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मैच में भारतीय टीम प्रबंधन नीतीश कुमार रेड्डी और आयुष बदोनी में से किस को अंतिम एकादश में रखता है। ऑलराउंडर रेड्डी तेज गेंदबाजी करते हैं लेकिन गेंदबाजी में उनका इस्तेमाल कम ही किया जाता है। नीतीश दूसरे मैच में वाशिंगटन सुंदर की जगह खेले थे, लेकिन बल्लेबाजी और गेंदबाजों दोनों में प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। बदोनी मध्यक्रम के अच्छे बल्लेबाज और ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं और यहां की परिस्थितियां उनके लिए अनुकूल हो सकती हैं। अगर बदोनी को मौका मिलता है तो वह डेब्यू करेंगे। हालांकि, टीम प्रबंधन नीतीश को एक और मौका दे सकता है।
इंदौर के होलकर स्टेडियम की छोटी बाउंड्री और गेंदबाजों को विकेट से बहुत कम मदद मिलने के कारण गलती की गुंजाइश और भी कम हो जाती है। स्पिन गेंदबाजी का सामना करने की भारत की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। टीम की बल्लेबाजी में गहराई और मजबूती होने के बावजूद उसके बल्लेबाज बीच के ओवरों में स्पिनरों के सामने असहज दिख रहे हैं। बल्लेबाज महत्वपूर्ण मौकों पर स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पा रहे हैं। अब बड़े स्कोर वाले मैदान पर बीच के ओवर निर्णायक साबित हो सकते हैं।
मार्च 2019 के बाद से भारत ने अपने घरेलू मैदान पर कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं हारी है। तब ऑस्ट्रेलिया ने 0-2 से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए सीरीज 3-2 से जीती थी, लेकिन अब यह रिकॉर्ड दांव पर लगा है। न्यूजीलैंड के लिए भी यह मैच काफी महत्वपूर्ण है। उसकी टीम ने 1989 से द्विपक्षीय वनडे मैचों के लिए भारत का दौरा किया है, लेकिन यहां कभी भी सीरीज नहीं जीती है। इस इंतजार को खत्म करने का यह उसके पास संभवत: सबसे अच्छा अवसर है। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर नहीं चाहेंगे कि उनके नेतृत्व में घरेलू मैदान पर टीम को एक और सीरीज में हार का सामना करना पड़े। विशेषकर तब जब उन्होंने कई अनचाहे रिकॉर्ड बनाए हैं। गंभीर के कोच रहते हुए भारत ने घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट मैच हारे हैं और पहली बार श्रीलंका में वनडे सीरीज गंवाई थी
