
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक सोमवार को 11 बजे होगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में होने जा रही इस बैठक में पंचायत चुनाव पर आए हाईकोर्ट के फैसले पर चर्चा होगी। इस निर्णय के बाद सरकार के अगले कदम पर निर्णय होगा। इसके अलावा बजट सत्र की तिथियां तय करने पर भी फैसला हो सकता है। राज्य मंत्रिमंडल की इस बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य समेत कई अन्य विभागों में चल रही रिक्तियों को भरने पर निर्णय हो सकता है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के कई अन्य एजेंडों पर भी चर्चा होगी। नई दिल्ली-शिमला और शिमला-धर्मशाला के लिए विमान सेवा के लिए एलायंस एयर को गैप फंडिंग के भुगतान का मामला भी राज्य मंत्रिमंडल कमेटी की बैठक में जाएगा। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसी स्थिति से निपटने की रणनीति पर भी कैबिनेट में चर्चा हो सकती है।
राज्य मंत्रिमंडल में परस्पर विरोधी बयान देने वाले कैबिनेट मंत्री सोमवार को आमने-सामने होंगे। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यूपी और बिहार मूल के आईएएस व आईपीएस अधिकारियों पर विवादित बयान दिया है तो राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी उनके बयान को उचित नहीं माना है। वहीं, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह के समर्थन में उतरकर कहा है कि दूसरे राज्यों के आईएएस अधिकारी ही नहीं, बल्कि राज्य काडर के कई अफसर भी नकारात्मक सोच वाले हैं। विक्रमादित्य सिंह की शंकाओं को मुख्यमंत्री को दूर करना चाहिए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों पर मंत्री की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को नसीहत दी है कि वह अपने विभाग पर ध्यान दें। सभी मंत्रियों को इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
हिमाचल के हित में लिए गए कैबिनेट के फैसलों का रिव्यू होगा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट सब कमेटी की बैठक होगी। कैबिनेट में अब तक जिन फैसलों को लागू नहीं किया गया है। इसकी भी समीक्षा होगी। मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को कैबिनेट के मामलों को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह को रिपोर्ट सौंपी जानी है। उल्लेखनीय है कि महीने में दो से तीन बार कैबिनेट की बैठक होती है। इस बैठकों में जनहित और वित्तीय संबंधित मामलों पर फैसले लिए जाते हैं। लेकिन कई योजनाएं सिरे चढ़ जाती है लेकिन कई मामलों फाइलों में ही दब जाते हैं। ऐसे में इन मामलों पर कैबिनेट में ही सब कमेटी गठित की गई। यह कमेटी लागू किए गए फैसलों और योजनाएं शुरू न किए जाने की निगरानी करेगी।
