
न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद अब यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। इससे हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को एक और झटका लगा है। बागवानों का कहना है कि विदेश से आने वाले सेब के साथ हिमाचल का सेब स्पर्धा नहीं कर पाएगा, जिससे उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। इससे पहले न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटाया गया था।
उधर, केंद्र सरकार के मुताबिक ईयू से केवल 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही 20 प्रतिशत ड्यूटी पर भारत आएगा। इसमें न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो होगा। यह मात्रा सालाना एक लाख टन तक बढ़ सकती है और नया प्रावधान अगले 10 वर्षों के लिए ही प्रभावी रहेगा। भारत अभी ईयू से सेब के आयात पर लगभग 50 प्रतिशत ड्यूटी लगाता है। केंद्र ने स्पष्टीकरण दिया है कि यूरोपीय संघ से सीमित मात्रा में आयातित सेब पर ही 20 फीसदी आयात शुल्क होगा। यूनियन से आने वाले सेब पर न्यूनतम प्रभावी लैंडेड कीमत 96 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। इससे घरेलू कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और किसानों की आमदनी भी सुरक्षित रहेगी।
आंकड़े बताते हैं कि भारत ने 2024 में लगभग पांच लाख टन सेब का आयात किया। लगभग 26 प्रतिशत यानी लगभग 1,33,447 टन ईरान, 23 प्रतिशत यानी लगभग 1,16,680 टन सेब तुर्की और 42,716 टन या 8.2 प्रतिशत अफगानिस्तान से आया। ईयू से केवल करीब 56,717 टन सेब भारत के लिए आयात किया गया। हिमाचल प्रदेश के बागवानों को चिंता है कि शुल्क कम किए जाने के बाद अब ईयू से भारत के लिए सेब का आयात बढ़ जाएगा।
ईयू से सेब का आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी करना हिमाचल के बागवानों के हितों पर कुठाराघात है। यह हिमाचल की सेब बागवानी को तबाह कर देगा। पहले न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटाकर 25 फीसदी किया गया। इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाया जा चुका है। अब ईयू से सेब आयात शुल्क घटाने के निर्णय का भी विरोध किया जाएगा। – जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री
यूरोपियन देशों के साथ नए समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला बागवान विरोधी है। सस्ता विदेशी सेब भारतीय बाजार में आने से स्थानीय सेब उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। भाजपा सरकार विदेशी सेब को बढ़ावा दे रही है। – रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री
यह फैसला बागवान विरोधी है। केंद्र सरकार हिमाचल के सेब बागवानों के साथ अन्याय कर रही है। यह निर्णय प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल नारे के साथ भी विरोधाभासी है। तुर्की और ईरान का सेब 50 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद 48 रुपये प्रति किलो तक भारत की मंडियों में पहुंचा है। कहां बागवान 100 फीसदी आयात शुल्क की मांग कर रहे थे और कहां इसे घटाकर 20 फीसदी किया गया है। – हरीश चौहान, हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष
