
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मातृ मेडिसिटी और ऑर्थोकेयर जैसे निजी अस्पतालों के आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजना के स्वीकृत बिलों का भुगतान अगली सुनवाई तक जारी करने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि जब अस्पताल पैनल में हैं और उनके बिल भी स्वीकृत हो चुके हैं, तो भुगतान रोकना न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से किसी को वंचित न रखना है, जिसे भुगतान रोककर बाधित नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार को आदेश दिए हैं कि अगली तारीख से पहले याचिकाकर्ता अस्पतालों के सभी स्वीकृत बिलों का भुगतान करें। अदालत ने प्रतिवादी राज्य सरकार सहित केंद्र सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
मातृ मेडिसिटी और अन्य अस्पताल प्रबंधनों ने न्यायालय में याचिका दायर कर बताया कि वे आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजनाओं के तहत पैनल में शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत वे मरीजों को पूरी तरह कैशलेस इलाज मुहैया करा रहे हैं। इनका तर्क है कि उनकी ओर से जमा किए गए सभी क्लेम, बिल स्वीकृत किए जा चुके हैं। सरकार की वेबसाइट पर भी ये बिल स्वीकृत दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद सरकार लंबे समय से इन पैसों को जारी नहीं कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि भुगतान न होने के कारण अस्पतालों के सामने भारी वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। कैश फ्लो रुकने से अस्पतालों को अपने दैनिक कामकाज और कर्मचारियों के वेतन देने में कठिनाई हो रही है।
