
शिमला। हिमाचल प्रदेश में दिल्ली पुलिस और प्रदेश पुलिस के बीच कथित टकराव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दल भाजपा ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाते हुए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को ज्ञापन सौंपा।
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल लोक भवन पहुंचा और केंद्र सरकार के माध्यम से मामले की जांच, मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
‘कानून के शासन पर प्रहार’ : जयराम ठाकुर
राज्यपाल से मुलाकात के बाद जयराम ठाकुर ने मीडिया से कहा कि मामला केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एआई समिट-2026 के दौरान यूथ कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों ने कथित रूप से अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। उनके अनुसार, दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस ने विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की और कुछ आरोपी हिमाचल प्रदेश में शरण लिए हुए थे।
जयराम ने दावा किया कि आरोपियों को हिमाचल सदन में ठहराया गया तथा कमरों की बुकिंग मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से कराई गई। उन्होंने इसे “संगठित संरक्षण” का संकेत बताया।
उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस की टीम रोहड़ू के चांशल वैली क्षेत्र से सौरभ सिंह, अरवाज और सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर रही थी, लेकिन धर्मपुर पहुंचने पर उन्हें रोका गया और रात 8:11 बजे उनके खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रांजिट रिमांड दिए जाने के बावजूद पुलिस टीम को आगे बढ़ने से रोका गया और वाहन जब्त करने की कोशिश की गई।
“करीब 24 घंटे तक दोनों राज्यों की पुलिस आमने-सामने रही, जो संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है,” उन्होंने कहा।
‘स्थानीय पुलिस को सूचना देना अनिवार्य’ : नरेश चौहान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य में गिरफ्तारी करने से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना कानूनन अनिवार्य है। उनके अनुसार, दिल्ली और हरियाणा पुलिस के कुछ अधिकारी बिना वर्दी के प्रदेश में आए और कार्रवाई की, जिसे हिमाचल पुलिस ने गैरकानूनी माना।
चौहान ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने संदीप कुमार बनाम दिल्ली सरकार मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि दूसरे राज्यों में गिरफ्तारी के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे प्रदेश के 75 लाख लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया।
भाजपा का आरोप: ‘अराजकता और संरक्षणवाद’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता, संरक्षणवाद और सांविधानिक अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है।
ऊना में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि एआई समिट से जुड़े गंभीर आरोपों में घिरे लोगों को संरक्षण देने के लिए प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था को टकराव की स्थिति में ला दिया।
कांग्रेस का पलटवार: ‘अघोषित आपातकाल’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाई जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि युवा कांग्रेस के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से केंद्र सरकार बौखला गई है और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। “अगर कोई पुलिस बिना सूचना दिए किसी राज्य में आकर लोगों को हिरासत में लेने की कोशिश करती है, तो यह राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन है,” उन्होंने कहा।
इस घटनाक्रम ने हिमाचल प्रदेश और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मामले की स्वतंत्र जांच होती है और संघीय ढांचे से जुड़े सवालों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
