
हिमाचल प्रदेश में आगामी दिन के दौरान मौसम शुष्क रहने की संभावना है। छह मार्च तक मौसम शुष्क रहेगा। सात मार्च को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना है। मौसम केंद्र शिमला के अनुसार अगले पांच दिन तक राज्य के किसी भी जिले में कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है।
रविवार को कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। ऊंची पहाड़ियों में तापमान -4 से 2 डिग्री सेल्सियस, मध्य पहाड़ियों में 4 से 12 डिग्री, निचले और मैदानी क्षेत्रों में 7 से 14 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। अधिकतम तापमान भी सामान्य से 3 से 7 डिग्री अधिक दर्ज किया गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान ताबो में -4.2 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान ऊना में 30.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चार मार्च की रात से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका असर 7 मार्च को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
रविवार को प्रदेश के सभी जिलों में मौसम साफ रहा। दिन भर धूप खिली रही। इससे गर्मी का अहसास होने लगा है। हालांकि, सात मार्च को प्रदेश में एक बार फिर से मौसम एक बार फिर से खराब होने के आसार हैं। बारिश और हिमपात का अनुमान विभाग ने जताया है।
कोकसर में 40 दिन बाद पर्यटन गतिविधियां शुरू
लाहौल स्पीति और कुल्लू में रविवार को मौसम साफ बना रहा और खिली धूप के बीच पर्यटक अटल टनल रोहतांग होकर लाहौल की वादियों में पहुंचे। लाहौल की ग्राम पंचायत कोकसर में 40 दिनों के बाद पर्यटन गतिविधियां शुरू हुईं। पर्यटन कारोबारियों में भी 40 दिनों बाद गतिविधियां शुरू होने को लेकर उत्साह देखने को मिला। जिला कुल्लू में अभी भी 11 सड़कें बंद हैं।
बारिश न होने से किसान और बागवान परेशान, गेहूं की फसल सेब पर संकट
पिछले काफी समय से बारिश न होने के कारण किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है। प्रदेश के कई हिस्सों में गेहूं की फसल फिर से मुरझाने लगी है। वहीं, रबी की अन्य फसलें भी नमी की कमी से प्रभावित हो रही हैं। पर्याप्त नमी न मिलने से गेहूं का विकास रुक गया है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां किसान किसी तरह फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जहां सिंचाई के साधन नहीं हैं, वहां स्थिति अधिक गंभीर होती जा रही है।
सेब उत्पादक क्षेत्रों में भी सूखे जैसे हालात का असर दिखने लगा है। पिछले महीने हुई बारिश के बाद बड़े स्तर पर पौधरोपण का कार्य शुरू हुआ। सेब के साथ-साथ स्टोन फ्रूट और नाशपाती के हजारों पौधे लगाए गए। अब करीब एक महीने से चल रहा पौधरोपण कार्य रुक गया है। बागवानों का कहना है कि जिन पौधों को पहले ही रोपित किया जा चुका है, वे भी सूखे की चपेट में आ रहे हैं।
बारिश नहीं हुई तो गेहूं पर पड़ेगा असर : जसरोटिया
कृषि विभाग के निदेशक डॉ. रविंदर सिंह जसरोटिया ने कहा है कि यदि अगले सप्ताह तक प्रदेश में बारिश नहीं होती है तो इसका गेहूं सहित अन्य रबी फसलों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पिछले कुछ समय से मौसम लगातार शुष्क बना हुआ है और बारिश न होने के कारण खेतों में नमी की कमी हो रही है। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने कहा है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है तो इसका बागवानी क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
