
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन में कहा कि संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारी अहम पदों से तुरंत हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह बात विपक्ष की ओर से मामले में हमलावर रुख अपनाए जाने के बाद कही। विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की पहली बैठक शुरू होते ही पहला प्रश्न इस तरह की नियुक्तियों पर ऊना के भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने उठाया। इस पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी अनुपूरक प्रश्न किया।
सत्ती ने ऊना में बंदोबस्त के लिए तैनात तहसीलदार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और कहा कि आरोपों के बावजूद सरकार ने इस अधिकारी को तीन बार सेवा विस्तार दिया है। करीब 60 किसानों ने तहसीलदार पर उनकी जमीन प्रभावशाली लोगों के नाम करवाने का आरोप लगाया है और मामला अदालत में विचाराधीन है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार से अनुपूरक प्रश्न किया कि उच्च न्यायालय में दी गई संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों की सूची में क्या केवल तीन ही नाम हैं या और भी अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने पूरी सूची सदन के सामने रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जो भी अधिकारी ऐसी नियुक्तियों वाले होंगे, उन्हें तुरंत प्रभाव से हटा देंगे।
सदन के पटल पर रखे गए जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों में राजस्व विभाग में तैनात विजय कुमार राय तहसीलदार (सेवानिवृत्त) को 01-10-2024 से 28-02-2025 तक 38,760 रुपये मासिक पर 6 माह का सेवा विस्तार दिया गया। कोष लेखा एवं लॉटरीज विभाग में तैनात युद्धवीर सिंह ठाकुर को 20-05-2024 से 19-11-2024 तक पुनर्नियुक्ति दी गई। प्रशासनिक सुधार विभाग के तहत राज्य सूचना आयोग में तैनात राय बहादुर सिंह श्रेणी ए को 01-02-2024 से 31-07-2024 तक 6 माह के लिए 1,31,404 रुपये मासिक पर सेवा विस्तार और 01-08-2024 से 31-01-2025 तक 2,23,920 रुपये प्रतिवर्ष पर 6 माह के लिए पुनर्नियुक्ति दी गई। पिछले दो वर्षों में संदिग्ध निष्ठा की सूची से बाहर आए अधिकारियों में उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत राजस्व विभाग के महेंद्र लाल, वरिष्ठ सहायक उपायुक्त कार्यालय लाहौल-स्पीति शामिल हैं। इसके अलावा प्रशासनिक सुधार विभाग के अधीन राज्य सूचना आयोग में तैनात राय बहादुर नेगी 31-01-2025 को भारमुक्त होने के कारण संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों की सूची से बाहर आए।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने संदिग्ध निष्ठा वाले अधिकारियों के सेवा विस्तार व पुनर्नियुक्ति पर सख्ती करते हुए तुरंत समीक्षा करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की निष्ठा संदिग्ध पाई गई है, उनकी एक्सटेंशन या पुनर्नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए। यह एक्शन मुख्यमंत्री के विधानसभा में किए गए एलान के बाद लिया गया है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार भविष्य में भी ऐसे अधिकारियों को किसी भी प्रकार का सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति नहीं दी जाएगी। सरकार ने सभी विभागों को निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तत्काल भेजने को कहा है। इस आदेश को अत्यंत जरूरी श्रेणी में रखा गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सदस्य की ओर से जो बातें सामने लाई गई हैं, उस पर वह आश्वासन ही नहीं देते, बल्कि सीधी कार्रवाई करते हैं। जितने भी ओडीआई अधिकारी हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से हटाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की ओर से अन्य अधिकारियों की बात करने पर सीएम बोले – अगर विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर कोई नाम देंगे, तो उसे भी तुरंत प्रभाव से हटा दिया जाएगा।
प्रदेश में चल रही एलपीजी की कमी का असर विधानसभा में भी देखने को मिला। विधानसभा के किचन में चाय बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल किया गया। कर्मचारियों को हीटिंग प्वाइंट के पास इंडक्शन चूल्हे लगाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी।
